बदायूं। पांच साल पहले सपा सरकार के दौरान जिले के बड़ी आबादी वाले बिनावर, नाधा और दबतोरी को ब्लॉक का दर्जा दिया गया था। तीन नए ब्लॉकों के गठन का शासनादेश जारी होने के बाद नाधा, बिनावर और दबतोरी में स्टाफ की तैनाती के साथ ब्लॉक स्तरीय सेवाएं भी शुरू हो गईं, लेकिन बाद में भाजपा की सरकार बनने के बाद काम आगे नहीं बढ़ सका। अब भी बिनावर के लोगों को सालारपुर, नाधा के लोगों को दहगवां और दबतोरी के लोगों को आसफपुर ब्लॉक जाना पड़ता है।
संभल जिले का गठन होने से पहले बदायूं में 18 ब्लॉक थे। गुन्नौर तहसील संभल जिले में शामिल हो गई थी। गुन्नौर के ब्लॉक रजपुरा, गुन्नौर और जुनावई संभल का हिस्सा हो गए। सपा सरकार में वर्ष 2011 की जनगणना को आधार मानते हुए बिनावर, नाधा और दबतोरी को ब्लॉक घोषित किया गया। 2017 के विधानसभा चुनावों से एन पहले यह नए ब्लॉक बनाए गए। बरेली रोड स्थित बिनावर कस्बा काफी विकसित है। बिनावर को ब्लॉक या नगर पंचायत बनाने की मांग काफी समय से हो रही थी। इसी तरह आसफपुर ब्लॉक का दबतोरी गांव बड़ी आबादी का गांव है। नाधा भी बड़ी आबादी का गांव है। इन बड़ी आबादी के गांवों में कॉलेज, पेट्रोल पंप, स्वास्थ्य केंद्र भी हैं। ब्लॉक के मानक पूरे होने के बाद भी तीनों बड़ी ग्राम पंचायतों के लोगों का ब्लॉक का सपना पांच साल के बाद भी पूरा नहीं हो सका है। ऐसे में लोगों में मायूसी है।
-
यह बोले लोग
पांच साल पहले नाधा को ब्लॉक का दर्जा मिला था तब विकास की उम्मीद जगी थी। बड़ी आबादी की ग्राम पंचायत नाधा में थाना तक नहीं है। बेहद पिछड़ा हुआ इलाका होने के बावजूद यहां विकास पर किसी का ध्यान नहीं जाता। ब्लॉक स्तरीय कार्यों के लिए भी यहां के लोगों को भागदौड़ करनी होती है।
-महेश गुप्ता, नाधा
-
नाधा काफी पिछड़ा हुआ है। पांच साल पहले ब्लॉक का दर्जा मिलने के बाद कुछ दिनों यहां स्टाफ की तैनाती भी रही। ब्लॉक स्तरीय सरकारी कामकाज शुरू होने के बाद लोगों का समय और भागदौड़ बच गई थी, लेकिन अब पांच साल के बाद तस्वीर बिल्कुल अलग है। नाधा के लोगों की ब्लॉक गठन की मांग अब तक पूरी नहीं हो सकी है।
-बृजवासी लाल यादव, नाधा
-
बिनावर में इंटर कॉलेज, डिग्री कॉलेज, थाना, अस्पताल सभी सुविधाएं हैं बिनावर को नगर पंचायत या फिर ब्लॉक होना चाहिए। यहां के लोगों को विभागीय कार्यों के लिए सालारपुर ब्लॉक या फिर जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी होती है। पांच साल पहले ब्लॉक का गठन हुआ था, लेकिन ब्लॉक गठन चुनावी शिगूफा साबित हुआ।
-हरिओम सिंह, बिनावर
-
बिनावर ग्राम पंचायत आबादी समेत अन्य सभी मानकों पर नगर पंचायत और ब्लॉक के मानकों पर है। सपा सरकार के दौरान ब्लॉक गठन का ऐलान हुआ था। उम्मीद जगी थी कि अब बिनावर पर ब्लॉक मुुख्यालय होगा। पीएचसी के पुराने भवन में ब्लॉक कार्यालय भी स्थापित हो गया था। पांच साल के बाद भी ब्लॉक नहीं बन सका।
-हरीश सक्सेना, बिनावर
-
पांच साल पहले दबतोरी का ब्लॉक का दर्जा मिला था। चुनावी सीजन के दौरान सपा सरकार ने ब्लॉकों का गठन कर दिया। इसके बाद यहां ब्लॉक स्तरीय सरकारी कामकाज भी होने लगे, लेकिन बाद में भाजपा की सरकार आने के बाद ब्लॉक गठन की आगे की प्रक्रिया थम गई। पांच साल बाद भी दबतोरी ब्लॉक नहीं बन सका है।
-सुनील कठेरिया, दबतोरी
-
दबतोरी बड़ी आबादी का गांव है। यहां के लोगों को आसफपुर की दौड़ लगानी होती है। ग्राम पंचायत स्तर पर मिलने वाली तमाम सुविधाएं ग्रामीणों को समय से नहीं मिल पातीं। दबतोरी को ब्लॉक बनाने की प्रक्रिया पांच साल से रुकी हुई है। लोगों को उस वक्त उम्मीद जगी थी, लेकिन बाद भी ब्लॉक का सपना सपना ही बना रह गया।
-शफीक अहमद, प्रधान लक्ष्मीपुर