बदायूं। गंगा के जलस्तर में रविवार को भी मामूली गिरावट गई। रविवार को नरौरा बैराज से गंगा में 67 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा गया। इस दौरा मीटरगेज पर गंगा का जलस्तर 162.250 दर्ज किया गया है। मीटरगेज पर खतरे का निशान 162 पर है। पानी घटने से उसहैत और सहसवान के गांवों में कटान तेज हो गया है। अब तक सहसवान में सैकड़ों बीघा जमीन गंगा में समा चुकी है। गंगा के तटवर्ती गांवों में बाढ़ का पानी भरा होने से संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
पिछले कई दिनों तक नरौरा बैराज से गंगा में एक लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा गया था। इससे गंगा में उफान आ गया था। खतरे के निशान पर जलस्तर भी 60 सेमी तक ऊपर पहुंच गया था। इसके चलते सहैत के जटा, प्रेमी नगला, ठकुरी नगला, कमलैयापुर, जसवंत नगला, अहमद नगर बछौरा, दल नगला, कदम नगला और रहपुरा में बाढ़ का पानी घुस गया था। सहसवान के तोलिया नगला, कोतल नगला, आसे नगला, तोफ़ीनगला बाढ़ की चपेट में आ गए थे। अब तीन दिन से कम पानी छोड़ा जा रहा है। शनिवार को 83 हजार और रविवार को 67 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा गया। इससे गंगा के जलस्तर में कमी आने लगी है, लेकिन इसके साथ कटान तेज होने लगा है। उसहैत बांध पर अब भी अतिसंवेदनशील स्थिति बनी हुई है। जोरी नगला और गंगा-महावा बांध संवेदनशील श्रेणी में हैं।
इधर, बाढ़ प्रभावित गांवों में संक्रामक मच्छर और जल जनित बीमारियां फैलने का खतरा पैदा हो गया है। दरअसल, गंगा का जलस्तर कम होने के बाद बाढ़ का पानी तो उतरने लगा है, लेकिन बाढ़ग्रास्त गांवों और आस-पास गड्ढों में भरे पानी में सड़ांध आने लगी है। गौर करने वाली बात यह है कि गंगा के इन तटवर्ती गांवों में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर कुछ भी नहीं है।
बाढ़ से काफी नुकसान हुआ है। कटान में काफी जमीन गंगा में समा चुकी है। कटान अब भी हो रहा है। तटवर्ती गांवों में बुखार का भी प्रकोप बढ़ने लगा है। स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर कुछ भी नहीं है। -सौदान सिंह, तेलिया नगला
बाढ़ के सीजन में पहले तो फसलों का नुकसान होता है और जब बाढ़ कम होने लगती है तो संक्रामक बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है। इस बार भी तटवर्ती कई गांवों में संक्रामक बीमारियां फैलने लगी हैं। -राम बहादुर, तोफी नगला
तटवर्ती गांवों में सिर्फ बाढ़ ही नहीं संक्रामक बीमारियां भी हर वर्ष कहर बरपाती हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ग्रामीणों को काफी दूर जाना होता है। गांवों के आस-पास चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं नहीं हें।-राम सिंह, आसे नगला
तटवर्ती गांवों में सिर्फ बाढ़ ही समस्या नहीं है। यहां बाढ़ के बाद फैलने वाले संक्रामक बीमारियां कहीं बड़ी समस्या हैं। गांव में अब तक स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर कोई टीम नहीं पहुंची है। - दाताराम, तेलिया नगला