जिले में बनाई गई खरीद एजेंसियों की लापरवाही से किसानों को आढ़तियों के हाथ उपज बेचना मजबूरी है। किसान इस समय वैसे ही मौसम की मार का शिकार रहा। बची-खुची फसलों को बेचकर परिवार पालन में उसे कुछ सहारा मिल सकता था, लेकिन क्रय केंद्रों की अव्यवस्थाओं के चलते उन्हें यहां भी झटका लग रहा है।
खरीद केंद्र चलाने वाली संस्थाओं ने केंद्र संचालन में आने वाली समस्याओं को अधिकारियों के सामने उठाना शुरू कर दिया है। जहां एक ओर एसडीएम को केंद्र देखने को जिम्मा सौंपा गया, तो वहां एजेंसियों ने अपनी समस्याओं का रोना शुरू कर दिया। हालांकि इससे किसानों को कोई निजात मिलती नजर नहीं आ रही है। अभी खरीद काफी पीछे चल रही है। खरीद प्रभारी ने संकेत दिए हैं कि अब एजेंसियों से खरीद के मामले में जवाब-तलब होगा।
जिले में 114 क्रय केंद्र बनाए गए थे। जिस समय क्रय केंद्र बनाए गए थे, उस समय यह पता नहीं था कि किसान को मौसम इतना बड़ा झटका देगा। एजेंसियों ने भी अपनी-अपनी पैरवी कर अधिक से अधिक क्रय केंद्र हथियाने में कोई कोर-कसर नहीं नहीं छोड़ी। पीसीएफ तो इसमें पहले से ही बहुत आगे रहती है। स्टाफ की तुलना की जाए, तो पीसीएफ पर पहले भी अधिक स्टाफ नहीं होता था, फिर भी केंद्र चलते थे। इस बार भी पीसीएफ अधिक से अधिक सेंटर हासिल करने में कामयाब रही। पीसीएफ के केवल तीन कर्मचारियों के निलंबित हो जाने से इतनी बड़ी संख्या में सेंटर प्रभावित होकर बंद हो जाएंगे। यह बात पहली बार सामने आई। जवाब-तलब हाने की स्थिति आने से पहले की एजेंसियों ने अपनी समस्याएं गिनानी शुरू कर दी हैं।
एडीएम वित्त और खरीद प्रभारी आरपी यादव ने एजेंसियों का खेल समझते हुए सबसे पहले इनकी समस्याएं सुनने का समय तय किया है। इधर, एसडीएम से जब खरीद केंद्रों की जांच कराए जाने की बात आई तब एजेंसियों में खलबली शुरू हो गई। जल्दी ही केंद्रों के बारे में समीक्षा होगी और केंद्रों में भी फेल बदल की आशंकाएं जताई जा रही हैं।
गेहूं खरीद केंद्रों की कागजी स्थिति
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संस्था केंद्र संख्या
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विपणन 08
पीसीएफ 45
एसएफसी 07
यूपीएसएस 40
यूपीएग्रो 06
कर्मचारी कल्याण निगम 04
एफर्सीआइं 04
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सात संस्थाएं 114 कुल केंद्र
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