उझानी अस्पताल में पुलिस की मौजूदगी में भर्ती सचिन तोमर। संवाद
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उझानी (बदायूं)। जमीन से जुड़े मामले में धोखाधड़ी में कोर्ट के आदेश पर नामजद युवक की गिरफ्तारी को दबिश के दौरान पुलिस को घर पर आरोपी नहीं मिला तो पुलिस उसके छोटे भाई को पकड़ लाई। इससे दहशत में उसकी हालत बिगड़ गई। आनन-फानन में पुलिसकर्मी उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। चेकअप के दौरान उसका ब्लडप्रेशर काफी बढ़ा हुआ निकला। यह देख पुलिसकर्मियों के भी हाथ-पैर फूल गए। सेहत में सुधार होने के बाद आरोपी के भाई को उसके परिवार के हवाले कर दिया गया।
मामला कोतवाली क्षेत्र के गांव संजरपुर का है। गांव के ही विजेंद्र पुत्र नरवीर ने 25 जनवरी को जमीन संबंधी मामले में सदर कोतवाली में संजरपुर निवासी प्रवीण तोमर समेत चार लोगों को नामजद कराया था। नामजदों में बिल्सी निवासी अवधेश माहेश्वरी, अनुराग मिश्रा, बिल्सी क्षेत्र के ही गांव पुसगवां निवासी प्रदीप पुत्र भूरे भी शामिल थे। सदर कोतवाली पुलिस ने प्रदीप को गिरफ्तार भी कर लिया था। प्रवीण की तलाश में उझानी कोतवाली के दरोगा रनवीर सिंह ने पुलिस फोर्स के साथ सुबह करीब 11 बजे संजरपुर में प्रवीण के घर पर दबिश दी। घर पर प्रवीण नहीं मिला। बताते हैं कि लौटते समय पुलिस को गांव में ही धर्मशाला के पास प्रवीण का छोटा भाई सचिन तोमर मिल गया। पुलिस सचिन को उठा लाई।
पकड़े जाने की दहशत में सचिन सिर पकड़कर मौके पर ही बैठ गया। पसीने से उसका चेहरा भीग गया। सीने में तेज दर्द बताते हुए वह कराहने लगा। यह देख पुलिसकर्मियों के हाथ-पैर फूल गए। दरोगा ने प्रभारी निरीक्षक हरपाल सिंह बालियान को भी पूरे मामले से अवगत करा दिया। इसके बाद सचिन को लेकर पुलिस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची। चिकित्साधिकारी डॉ. निरंजन सिंह ने बताया कि घबराहट में सचिन का ब्लडप्रेशर 110-175 हो गया था। प्राथमिक उपचार के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ।
प्रभारी निरीक्षक के मुताबिक- सचिन को रास्ते में महज इसलिए रोक लिया गया था कि उससे आरोपी भाई के बारे में जानकारी हो जाए। पता लगा है कि सचिन का बरेली के निजी अस्पताल में भी ब्लडप्रेशर को लेकर इलाज चल चुका है। सचिन के लिए उसके घरवालों के हवाले कर दिया गया है।
भाई के चक्कर में सचिन ने कोतवाली में काटे थे तीन दिन
उझानी। सचिन तोमर इलाके के ही एक निजी स्कूल में अध्यापक है। भाई प्रवीण पर पिछले साल एक और गंभीर आरोप लगा था। हालांकि तब मामला पुलिस रिकार्ड में नहीं था लेकिन पुलिस ने एवज में सचिन को ही पकड़ लिया था। बताते हैं कि उस वक्त सचिन तीन दिन तक पुलिस में रहा। पैरोकारों के जरिए सचिन को पुलिस से राहत मिली तो वह भाई को पकड़वाने की जुगत में लग गया था। परिजन के मुताबिक- सचिन को लगा होगा कि कहीं इस बार भी कोतवाली में दिन नहीं गुजारने पड़ जाएं, इसलिए घबरा गया।