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Budaun: महिला के शव से आंखें निकालने के मामले में बड़ी कार्रवाई, पोस्टमार्टम करने वाले दोनों डॉक्टर गिरफ्तार

Thu, 14 Dec 2023 07:57 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं

सार

एसएसपी डॉ. ओपी सिंह ने बताया कि प्राथमिक जांच में दोनों डॉक्टर दोषी पाए गए हैं। उन्होंने न तो परिवार वालों को इसके बारे में बताया था और न ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आंखें गायब होने का जिक्र किया था।
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आरोपी डॉक्टर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बदायूं में पोस्टमार्टम के दौरान महिला के शव से आंखें निकालने के मामले में गठित कमेटी की प्राथमिक जांच में दोषी मिले डॉ. उवैस और डॉ. आरिफ हुसैन को बुधवार दोपहर गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से जेल भेज दिया गया। इन्हीं दोनों ने पहली बार पोस्टमार्टम किया था। 

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पहले से आंखें गायब होने का दावा करने वाले दोनों डॉक्टर प्रथम दृष्टया इसलिए संदिग्ध माने गए क्योंकि अपने कथन के विपरीत उन्होंने न तो परिवार वालों को सूचना दी थी और न ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जिक्र किया।

मुजरिया थाना क्षेत्र के ग्राम रसूला निवासी पूजा (20) पत्नी जोगेंद्र ने रविवार को फंदे से लटककर जान दे दी थी। सोमवार दोपहर उसके शव का पोस्टमार्टम कादरचौक सीएचसी के डॉ. मोहम्मद उवैस और जिला अस्पताल के क्षय रोग विभाग में तैनात डॉ. मोहम्मद आरिफ हुसैन के पैनल ने किया था। 
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कहां गईं महिला के शव की आंखें: चूहे खा गए या नेवले... दोबारा पोस्टमार्टम में भी नहीं हुआ खुलासा, कैसे गायब हुई

पूजा के मायके वाले शव को लेकर अपने गांव अलापुर के कुतरई चले गए थे। चूंकि उसका शव बॉडीबैग में रखा था और ऊपर काली पन्नी भी लिपटी हुई थी, इस कारण मायके वाले भी महिला का शव सही से नहीं देख पाए थे। अंतिम संस्कार से पहले घर पर पार्थिव शरीर जब बैग से बाहर निकाला गया तो उसकी आंखें न देख हैरान रह गए। 

दोबारा कराया गया था पोस्टमार्टम 
परिजनों की सूचना पर डीएम मनोज कुमार ने सोमवार रात को ही दोबारा पैनल से ही पोस्टमार्टम कराया। साथ ही मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की। दूसरी ओर सिविल लाइंस थाना पुलिस ने महिला के भाई राजकुमार की तहरीर पर एफआईआर दर्ज कर इसकी छानबीन शुरू कर दी। 

सोमवार रात से चल रही छानबीन के दौरान पुलिस और प्रशासन की प्राथमिक जांच में दोनों डॉक्टर दोषी पाए गए हैं। पहली बार पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम की धारा 18 और आईपीसी की धारा 297 (मानव भावनाओं को ठेस पहुंचाने) में मंगलवार को पूजा के भाई की ओर से रिपोर्ट दर्ज कर ली गई थी।



 

एक डॉक्टर कासगंज, दूसरा बरेली का रहने वाला 
एडीएम (प्रशासन) विजय कुमार सिंह की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय कमेटी की प्राथमिक जांच सामने आने के बाद दोनों डॉक्टरों को बुधवार दोपहर गिरफ्तार करके शाम करीब चार बजे न्यायालय में पेश किया गया। वहां से जेल भेजे गए डॉ. उवैस कासगंज के गंजडुंडवारा और डॉ. आरिफ हुसैन बरेली के बारादरी थाना क्षेत्र के मोहल्ला जगतपुर नई बस्ती के रहने वाले हैं। अभी इस मामले में किसी और कर्मचारी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।
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इन दोनों डॉक्टरों ने आंखें निकाली हैं या नहीं, यह तो जांच का विषय है लेकिन उन्होंने कई बड़ी लापरवाही कीं। सबसे पहले उन्होंने महिला के मायके वालों को आंखें गायब होने के बारे में बताया ही नहीं था। दूसरा, उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी आंखें गायब होने का जिक्र नहीं किया।

एसएसपी डॉ. ओपी सिंह ने बताया कि प्राथमिक जांच में दोनों डॉक्टर दोषी पाए गए हैं। उन्होंने न तो परिवार वालों को इसके बारे में बताया था और न ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आंखें गायब होने का जिक्र किया था। उन्होंने आंखें गायब होने की बात सबसे छिपाई। इस कारण उन्हें गिरफ्तार किया गया। बाकी विस्तृत जांच चल रही है। उसमें जो तथ्य सामने आएंगे उसके अनुसार कार्रवाई होगी।
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