दातागंज तहसील में लंबे समय से काम कर रहा गिरोह
जिंदा लोगों को दिखा रहे मृत, दूसरों की जमीनों के बैनामे
प्रशासन की नाक के नीचे जमीनों के फर्जी बैनामों के जरिया माफिया करोड़ों के बारे-न्यारे कर रहा है। इनके चुंगल में फंसे लोग रजिस्ट्री और तहसील कार्यालय के चक्कर काटते नजर आते हैं। तमाम मामले ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन पुलिस अब तक माफिया तक नहीं पहुंच सकी है। गौर करने वाली बात यह है कि जमीनों के नाम पर करोड़ों का फर्जीबाड़ा करने वाले लोग दातागंज क्षेत्र के ही हैं।
सबलपुर गांव के मजरा सूरजपुर खाम में तीन किसानों की जमीन बेचने का मामला हाल ही में सामने आया था। सबदलपुर नवदिया गांव के मृतक किसान ज्वाला पुत्र मैकू की भी जमीन बेच दी गई। इसी गांव के शिकार हुए किसान तहसील के चक्कर लगा रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि तहसील प्रशासन के लोग भी माफिया से मिले हुए हैं। सबदलपुर के ही तीन किसानों को मृत दिखाकर एक माफिया ने उनकी जमीन की अपने और अपने दो रिश्तेदारों के नाम फौती करा ली। मोती पुत्र दिलसुख, हरीओम पुत्र उदयवीर और जगदीश पुत्र उदयवीर माफिया और तहसील प्रशासन के भ्रष्टाचार के शिकार हुए। किसानों को जब इस बारे में पता लगा कि उनकी जमीन उनको मृत दिखाकर दूसरे लोगों के नाम दर्ज कर दी गई तो वह भी दंग रह गए। इस तरह के सैकड़ों मामले दातागंज तहसील क्षेत्र में सामने आ चुके हैं।
गौर करने वाली बात यह है कि शिकायतों को भी प्रशासन नजरअंदाज कर देता है। फर्जीबाड़ा करके करोड़ों रुपया हड़पने वालों तक पहुंचने की जरूरत ही नहीं समझी जाती। इतना ही नहीं दातागंज तहसील में एक ही जमीन के कई लोगों को बैनामा किए जाने के मामले भी उजागर हो चुके हैं। समरेर में एक ही जमीन को कई लोगों को बेच दिया गया। करीब 150 बीघा जमीन का दिल्ली के सुरेंद्र सिंह ने अपने और अपने परिवार वालों के नाम बैनामा कराया था। यह जमीन कई बार पहले भी बेची जा चुकी थी।
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ऋण लेकर बैंकों को भी लगाया जा रहा चूना
दातागंज। यूपी समेत हरियाणा, दिल्ली, पंजाब के तमाम लोगों ने दातागंज में हजारों बीघा जमीनें खरीदी हैं। गौर करने वाली बात यह है कि कटरी में जमीनों के सर्किल रेट के मुकाबले कई गुना जमीन सस्ती मिल जाती है। इसी जमीन का बैनामा कराने के बाद सर्किल रेट के आधार पर बैंकों से ऋण ले लिया जाता है। बैंकों को चूना लगने के साथ आयकर विभाग को भी चपत लगाई जा रहा है। दरअसल, कृषि से हुई आमदनी पर आयकर नहीं लगता। कई बड़े उद्योगपति इसका फायदा कटरी की जमीनों के जरिए उठा रहे हैं।