बदायूं। जिले में भारतीय जनता पार्टी पिछले चुनाव की अपेक्षा इस बार दो सीटों के नुकसान में रही पर वोट बैंक का नुकसान नहीं हुआ। इस बार भी पार्टी को पिछले चुनाव के मुकाबले अधिक वोट मिले। यही नहीं पार्टी जिन सीटों पर चुनाव हारी वहां भी पिछले चुनाव के अनुसार ज्यादा वोट मिले। इन्हीं आंकड़ों की बदौलत पार्टी नेता सफाई दे रहे हैं कि जिले में भाजपा की लोकप्रियता बढ़ी है और पार्टी के मुद्दों को पसंद किया गया है।
जिले में विधानसभा की छह सीटें हैं। सहसवान विधानसभा सीट पर वर्षों से सपा या दूसरे दलों का कब्जा रहा है। यही नहीं शेखूपुर, बिसौली और दातागंज सीट पर भी दूसरे दल हावी रहे हैं। अगर शहर सीट की बात करें तो 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी आबिद रजा जीते थे। जबकि भाजपा प्रत्याशी महेश चंद्र गुप्ता को हार का सामना करना पड़ा था। 2012 में सपा की पूर्ण बहुमत से सरकार बनी थी लेकिन उसके बाद से भाजपा के वोट बैंक में बढ़ोतरी होती चली गई। इसका नतीजा 2017 के विधानसभा चुनाव में देखने को मिला। बदायूं जिले में शहर, दातागंज, शेखूपुर, बिसौली और बिल्सी सीट पर भाजपा का कब्जा हो गया लेकिन सहसवान सीट सपा प्रत्याशी ओमकार सिंह यादव के पाले में चली गई।
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को पिछली बार के मुकाबले दो सीटें ज्यादा खोनी पड़ीं। भाजपा इस बार शेखूपुर और बिसौली सीट हार गई। इन पर सपा विजयी रहे तो सहसवान सीट पर सपा के ही विधायक ओमकार सिंह यादव के बेटे ब्रजेश यादव का कब्जा हो गया। इस सीट पर भाजपा पिछली बार भी हारी थी।
भाजपा के लिए तसल्ली की बात ये है कि दो और सीटें हारने के बावजूद उसका वोट बैंक कम होने के बजाय कम हुआ।
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भाजपा प्रत्याशियों पिछली और इस बार के चुनाव में मिले वोट
शहर विधानसभा
2017- महेश चंद्र गुप्ता - 87314
2022- महेश चंद्र गुप्ता - 100717
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शेखूपुर विधानसभा
2017- धर्मेंद्र कुमार शाक्य - 93702
2022- धर्मेंद्र कुमार शाक्य- 99259
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बिल्सी विधानसभा
2017- आरके शर्मा- 82070
2022- हरीश शाक्य- 93329
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बिसौली विधानसभा
2017- कुशाग्र सागर- 100289
2022- कुशाग्र सागर -108525
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सहसवान विधानसभा
2017- आशुतोष वार्ष्णेय उर्फ भोला - 24152
2022- डीके भारद्वाज - 66166
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दातागंज विधानसभा
2017- राजीव कुमार सिंह - 79110
2022- राजीव कुमार सिंह - 107457
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भाजपा जिलाध्यक्ष बोले- वोट बैंक बढ़ा, हार की समीक्षा करेंगे
भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव कुमार गुप्ता का कहना है कि जिले में पार्टी भले ही तीन सीटें हारी है पर पार्टी का वोट बैंक बढ़ा है। हमें खुशी है कि लोग भाजपा की योजनाओं और कार्यशैली को पसंद कर रहे हैं। हार की वजह स्थानीय समीकरण या कुछ और बातें हो सकती हैं जिन पर हमेशा की तरह समीक्षा की जाएगी। जिस स्तर पर कमी है, उसे दूर किया जाएगा।