बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव दिधौनी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का बृहस्पतिवार को समापन हो गया। कथा में सुदामा चरित्र का वर्णन किया गया।
गंज डुंडवारा से पधारीं ममता शाक्य ने कहा कि सच्चा मित्र वही होता है, जो विपत्ति के समय काम आए। संसार में सबसे धनवान वही है जिसके पास रामनाम रूपी धन है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा से वातावरण एवं वायुमंडल शुद्ध होने के साथ व्यक्ति को आत्मिक बल मिलता है। व्यक्ति में धार्मिक आस्था जागृत होती है। दुर्गुणों की बजाय सद्गुणों के द्वार खुलते हैं। यज्ञ से देवता प्रसन्न होकर मनवांछित फल प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है।
श्रीमद्भागवत से जीव में भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य के भाव उत्पन्न होते हैं। इसके श्रवण मात्र से व्यक्ति के पाप, पुण्य में बदल जाते हैं। विचारों में बदलाव होने पर व्यक्ति के आचरण में भी स्वयं बदलाव हो जाता है। कथावाचक ने भंडारे के प्रसाद का भी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि प्रसाद तीन अक्षरों से मिलकर बना है। प्र का अर्थ है प्रभु, सा का अर्थ है साक्षात और द का अर्थ होता है दर्शन।
उन्होंने कहा कि हर कथा या अनुष्ठान का तत्वसार होता है जो मन बुद्धि व चित को निर्मल कर देता है। मनुष्य शरीर भी भगवान का दिया हुआ सर्वश्रेष्ठ प्रसाद है। जीवन में प्रसाद का अपमान करने से भगवान का ही अपमान होता है। भगवान का लगाए गए भोग का बचा हुआ शेष भाग मनुष्यों के लिए प्रसाद बन जाता है। इस दौरान श्री राधा-कृष्ण की सुंदर झांकी भी सजाई गई। भजनों पर श्रोतागण झूमते रहे। कथा समापन पर विधिविधान से लोगों ने पूजा-अर्चना की। शुक्रवार को कथा स्थल पर भंडारा आयोजित किया जाएगा। कथा को सफल बनाने में रामप्रकाश सिंह कृष्णमुरारी, देवपाल, राधेश्याम, विवेक कुमार सिंह, लोकपाल शाक्य, रामगोपाल शाक्य, सुरेंद्र प्रजापति, मोहनलाल, संजीव कुमार, ज्योति रानी आदि का विशेष सहयोग रहा। संवाद