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मायावती के खिलाफ भाजपा से चुनाव लड़ चुका है योगेंद्र

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बदायूं। पूर्व विधायक योगेंद्र सागर का राजनीतिक सफर लंबा होने के साथ विवादों से घिरा रहा। पहली बार वह 1993 के मध्यावधि चुनाव में भाजपा से बिल्सी विधायक चुने गया। 1996 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने योगेंद्र को बसपा सुप्रीमो मायावती के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारा। इस चुनाव में वह मायावती से करीब दो हजार वोट से हार गया। इसके बाद भाजपा में योगेंद्र का कद बढ़ गया था। लेकिन कल्याण सिंह के भाजपा छोड़ते ही स्थिति खराब होने लगी। 2007 में बसपा के टिकट पर विधायक बना। बसपा ने 2016 निष्कासित कर दिया। इसके बाद फिर वह भाजपा में शामिल हो गया।
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कल्याण सिंह की सरकार बनते ही योगेंद्र सागर को भाजपा सरकार में लाल बत्ती से नवाजा गया। वह 1997 से 2000 के बीच आईटीआर के चेयरमैन (दर्जा राज्यमंत्री) भी रहा। कल्याण सिंह के भाजपा छोड़ने के बाद योगेंद्र सागर की भाजपा से दूरियां बढ़ गईं। 2007 का चुनाव आते-आते उसने बसपा में गोटियां सेट कर लीं। इस बार वह बिल्सी क्षेत्र से बसपा के टिकट पर विधायक चुना गया। वर्ष 2007 से 2012 के बीच प्रदेश में बसपा सरकार के दौरान योगेंद्र सागर की तूती बोलती रही। यही वह दौर था जब अप्रैल 2008 में उन पर अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगा।
बसपा सरकार के दौरान अक्तूबर 2008 विवेचना ट्रांसफर कराने के बाद वह सीबीसीआईडी से मामले में फाइनल रिपोर्ट लगवाने में भी कामयाब हो गया। लेकिन पीड़ित पक्ष ने प्रोटेस्ट कर दिया। इस दौरान योगेंद्र सागर बसपा में ही बना रहा। वर्ष 2012 में उसने अपनी पत्नी प्रीति सागर को बिसौली विधानसभा क्षेत्र से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ाया, लेकिन उन्हें शिकस्त मिली। 2017 के चुनाव में वह बसपा से ही बेटे कुशाग्र सागर को विधायकी लड़ाने के लिए प्रयासरत था। टिकट न मिलता देख भाजपा से नजदीकियां बढ़ाईं। इसके बाद अप्रैल 2016 में बसपा से निष्कासित कर दिया गया। 2017 के चुनाव में योगेंद्र सागर के बेटे कुशाग्र सागर भाजपा के टिकट पर बिसौली विधानसभा क्षेत्र से प्रदेश में सबसे कम उम्र के विधायक चुने गए।
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भाजपा में अर्श पर और भाजपा में ही फर्श पर आए सागर
अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दोषी करार दिए गए योगेंद्र सागर के राजनीतिक सफर पर गौर करें तो भाजपा में ही उन्होंने अपने राजनीतिक सफर का स्वर्णिम काल देखा। पहली बार भाजपा के टिकट पर विधायक चुना गया। 2007 में जरूर बसपा के टिकट पर विधायक चुने गया, लेकिन फिर से भाजपा में वापसी कराकर 2017 के चुनाव में अपने बेटे कुशाग्र सागर को बिसौली से टिकट दिलाने के साथ विधायक बनवाने में भी कामयाब हो गया। इतना ही नहीं सपा की जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चंद्रा के खिलाफ अविश्वास के बाद नवंबर 2019 में वह अपनी पत्नी प्रीति सागर को जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी पर काबिज कराने में भी कामयाब हो गया। अब भाजपा शासन में ही उसे उम्रकैद हुई है।
पीड़ित पक्ष बोला : न्याय पालिका पर पूरा भरोसा था
न्याय पालिका पर पूरा भरोसा था। योगेंद्र सागर ने अत्याचार किया था उसकी उनको सजा मिली है। हालांकि, न्याय के लिए हमारे परिवार को 13 साल की लंबी न्यायिक लड़ाई लड़नी पड़ी है। अत्याचारी को सजा मिलने से मानसिक सुकून मिला है। कोर्ट के इस फैसले से लोगों का न्याय पालिका पर भरोसा बढ़ेगा।
- पीड़ित छात्रा के भाई
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यह बोले विपक्षी दल
भाजपा कोर्ट के फैसले का स्वागत करती है। योगेंद्र सागर भाजपा के प्राथमिक सदस्य नहीं हैं। उनके बेटे कुशाग्र सागर बिसौली से हमारी पार्टी के विधायक हैं। इस मामले में कोर्ट के फैसले को लेकर मैं फिलहाल किसी प्रकार की टिप्पणी करना नहीं चाहता।
- राजीव गुप्ता, भाजपा जिलाध्यक्ष
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कोर्ट के फैसले से साबित हो गया है कि योगेंद्र सागर अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म में शामिल थे। सपा कोर्ट के फैसले का स्वागत करती है। अपहरण और दुष्कर्म के मामले में दोषी को लेकर कोर्ट का यह बिल्कुल सही निर्णय है। अब भाजपा को अपने गिरेबान में झांकना ही होगा।
-प्रेमपाल सिंह यादव, सपा जिलाध्यक्ष
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अगर कोर्ट ने योगेंद्र सागर को दोषी माना है तो जाहिर है कि वह अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म में संलिप्त रहे ही होंगे। न्याय पालिका हर पहलू पर बारीकी से अध्ययन करने के बाद ही किसी मामले में फैसला देती है। न्याय पालिका का फैसला स्वागत योग्य है, यह जनभावना के अनुरूप है।
-ओमकार सिंह, कांग्रेस जिलाध्यक्ष
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न्यायालय का निर्णय स्वागत योग्य है। हम इसका सम्मान करते हैं। यह सही है कि घटना के वक्त योगेंद्र सागर हमारी पार्टी के विधायक थे पर दूसरे मामलों की तरह बसपा सुप्रीमो ने उन्हें भी निष्कासित कर दिया था। हमारी पार्टी में गलत लोगों के लिए न पहले जगह थी और न आज है।
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- हेमेंद्र गौतम, बसपा जिलाध्यक्ष
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