सिविल लाइंस इलाके की बाबा कॉलोनी निवासी विनोद कुमार लखीमपुर खीरी जिले के मोहम्मदी में जलजीवन मिशन में ठेकेदारी करते हैं। पत्नी सुनीता ब्यूटी पार्लर चलाती हैं। परिवार खुशहाल था। दादी मुन्नी देवी उझानी में होमगार्ड हैं। वह बार-बार दोनों पोतों को याद कर बेसुध हो रहीं हैं। रोते-रोते उनका यही कहना है कि हंसते-खेलते परिवार को पता नहीं किसकी नजर लग गई। बच्चों की मां सुनीता जब भी होश में आती हैं, तो उनके मुंह से यही निकलता है कि मेरे आयुष और अहान को बुलाओ। कुछ देर रोने के बाद वह फिर से अचेत हो जाती हैं।
आयुष और अहान की हत्या के बाद बच्चों की दादी मुन्नी देवी ने कहा कि हत्या का कारण साफ हो। पुलिस हमें बताए, हमारी गलती क्या है। क्यों घटना हुई। उन्होंने कहा कि आरोपी ने अपनी परेशानी बताई तो उसे हमारी बहू ने पांच हजार रुपये दिए। फिर भी उसने बच्चों की जान ले ली। अब पुलिस दूसरे आरोपी को गिरफ्तार करे और उससे पूछताछ करे तो पूरा मामला खुल जाएगा।
दादी मुन्नी देवी ने कहा कि आरोपी जावेद और साजिद के साथ रुपयों का लेनदेन उनकी जानकारी में नहीं है। बोलीं, अगर वह बेटे विनोद से रुपये ले जाते थे, तो उन्हें पता नहीं। उन्होंने बताया कि पूरे मोहल्ले में उनकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं। बच्चे तो दोनों आरोपियों को भइया जी कहकर बुलाते थे। घर के सामने ही साजिद की दुकान होने के कारण बच्चे बाल कटवाने भी साजिद-जावेद के पास जाते थे।
उन्होंने बताया कि जब हत्याकांड हुआ तब वह कमरे में थी। मझला नाती पीयूष छत पर साजिद के लिए पानी लेकर गया तो उसके मुंह से यही निकला अरे! साजिद भइया ये क्या कर रहे हो? वह चीखा तो हत्यारे ने उसका मुंह दबाया। इस दौरान पीयूष के हाथ से पानी की गिलास छूटकर गिर गया। किसी तरह वह छत से नीचे आया और बोला- अरे! अम्मा दादा का तो साजिद भइया ने हाथ काट दिया। फिर बोला- अब ऊपर मत जाना। तब तक आरोपी भी नीचे आ चुका था। ऊपर जाते वक्त उसके हाथ में चाकू नहीं दिखा था, लेकिन जब नीचे आया तो हाथ में खून से सना चाकू था।