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बा स्कूलों में सामान खरीद में घोटाले का जिन्न फिर निकला

Wed, 02 Sep 2015 12:21 AM IST
बदायूं
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जिले में कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों के सामान खरीद में हुए घोटाले की जांच फिर से शुरू हो गई है। बेसिक शिक्षा विभाग के दो खंड शिक्षाधिकारियों के जांच से हाथ खड़े कर दिए जाने पर डीएम ने जिला समाज कल्याण अधिकारी और जिला पशुचिकित्साधिकारी को इसकी जांच सौंपी। यदि बारीकी से जांच होती है, तो घपला उजागर हो सकता है और कई अधिकारियों-कर्मचारियों पर गाज भी गिर सकती है।
जिले में इस समय 18 कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय स्कूल हैं। जिनमें अध्य्यनरत छात्राओं को रहने-खाने आदि की व्यवस्थाएं रहती हैं। छात्राओं को किसी तरह की असुविधा न हो इसके लिए शासन द्वारा इन स्कूलों के लिए भारी बजट भी दिया जाता है।
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यहां बता दें कि शैक्षिक सत्र 2013-14 में इन सभी स्कूलों में छात्राओं के लिए लिहाफ, दरी, अलमारी, कुर्सी, बर्तन, पंखे आदि सामान की खरीद को करीब सवा करोड़ से अधिक की धनराशि दी थी। इस सामान की खरीद में मानकों को ताक पर रख दिया गया और घटिया सामान खरीद लिया गया। किसी ने इसकी शिकायत शासन के अलावा प्रशासनिक अधिकारियों से की। खास बात तो यह है कि सामान की खरीद में हुए घोटाले को दबाने की भी कोशिश की गई थी। जिस समय इस सामान की खरीदारी का ऑडिट हुआ तो सिर्फ  खरीदे गए सामान की रसीदों को देखकर ही उसे पास कर दिया गया। तब यह मामला और तूल पकड़ गया।
उस समय जिले में तैनात रहे डीएम सीपी त्रिपाठी ने मामले को गंभीरता से लिया और उसकी जांच के आदेश दिए। बेसिक शिक्षा विभाग के सूत्र बताते हैं कि पहले खंड शिक्षाधिकारी जगत सोमनाथ विश्वकर्मा को जांच सौंपी गई थी। उन्होंने यह कहकर जांच लौटा दी की उन पर काफी दबाव पड़ रहा है। बाद में जांच सालारपुर के खंड शिक्षाधिकारी रमेश चंद्र जौहर को दी उन्होंने भी कुछ इसी तरह की बात कहकर जांच को लौटा दिया। मामला जब मौजूदा डीएम के सामने आया तो उन्होंने भी बारीकी से जांच कराने के आदेश दिए। डीएम के आदेश पर जांच समाज कल्याण अधिकारी एमके पाठक और पशुचिकित्साधिकारी को सौंपी गई। दो जिला स्तरीय अधिकारी अब जांच कर रहे हैं।
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एक-दूसरे के एकाउंट में भी निकला है अंतर
बदायूं। बा स्कूलों में हुए सामान खरीद के घोटाले की जड़ें काफी मजबूत हैं। सूत्र बताते हैं कि बा स्कूल और विभागीय एकाउंट में भी मेल नहीं खाया है। जिसकी वजह से मामला और भी पेचीदा हो गया।
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दो अधिकारियों की भूमिका रही है संदिग्ध
बदायूं। इस चर्चित मामले में बेसिक शिक्षा विभाग के दो अधिकारियों की भी भूमिका संदिग्ध रही है। सूत्र कह रहे हैं कि उन अधिकारियों की शह पर ही घटिया सामान खरीदा गया और आनन-फानन में उसका भुगतान भी संबंधित ठेकेदार को कर दिया गया। कहा जा रहा है यदि जरांच सही होती है, तो वो अधिकारी भी चपेटे में आ सकते हैं।
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जांच अधिकारी ने सहसवान पहुंचकर की पड़ताल
बदायूं। जांच अधिकारी समाज कल्याण अधिकारी एमके पाठक ने दूरभाष पर बताया कि उन्होंने आज ही सहसवान के बा स्कूल पहुंचकर संबंधित कागजातों को मांगा। वार्डन द्वारा कहा गया कि अभी उनके पास वो कागजात नहीं हैं। कहा कि सारा रिकार्ड बदायूं में है। जांच अधिकारी ने उनसे और भी कई जानकारियां दीं। खरीदे गए सामान को भी देखा।
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ट्रांसफर के बाद भी नहीं दे रहा बाबू चार्ज
विभागीय सूत्रों की बात को यदि सच मान लिया जाए तो इस मामले से जुड़े एक बाबूू का यहां से दूसरे जिले को तबादला हो गया है किंतु उसने अभी तक अपना चार्ज नहीं दिया है।
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