कोयला की दुकान पर कोयला खरीदता ग्राहक । संवाद
बदायूं। व्यावसायिक एलपीजी सिलिंडर की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अब बाजार में दिखने लगा है। सिलिंडर महंगा होते ही कोयला और लकड़ी के दामों में भी तेजी आ गई है। ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतों ने ढाबा, होटल और भट्ठियों के संचालन पर असर डालना शुरू कर दिया है। व्यापारी कहते हैं कि गैस के बाद कोयला-लकड़ी का महंगा होना उनके लिए दोहरी मार साबित हो रहा है।
जिले में लकड़ी का कोयला 5 रुपये प्रति किलो और लकड़ी दो से तीन रुपये प्रति किलो महंगी कर दी गई है। पहले लकड़ी का कोयला 40 रुपये किलो मिल रहा था, जो अब 45 रुपये किलो है। वहीं लकड़ी की कीमत 9 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 12 रुपये हो गई है। दुकानदारों का कहना है कि खपत बढ़ने के साथ ही आगे भी दामों में इजाफा संभव है। लकड़ी व्यापारी अशफाक ने बताया कि लागत और मांग बढ़ने के कारण फिलहाल दो रुपये से तीन रुपये की बढ़ोतरी की गई है।
दूसरी ओर ढाबा संचालक बढ़ती लागत से परेशान हैं। ढाबा संचालक त्रिलोकी सिंह का कहना है कि गैस, कोयला व लकड़ी तीनों ही ईंधन महंगे होने से उनके लिए पुराने रेट पर काम चलाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने बताया कि दाल व अन्य सभी व्यंजनों की कीमत कम से कम 10-10 रुपये बढ़ाने पड़ेंगे। गुणवत्ता के साथ समझौता नहीं किया जा सकता, इसलिए मजबूरी में कीमतें बढ़ानी पड़ रहीं हैं। ईंधन बाजार में आई इस तेजी का असर आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं की जेब पर और अधिक पड़ सकता है।