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अब रहेगा सिंथेटिक दूध का जोर... होली खराब न कर दें मुनाफाखोर

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बदायूं। त्योहार नजदीक आते ही सिंथेटिक दूध का धंधा बढ़ जाता है। सफेद दूध का काला धंधा करने वाले धंधेबाज और मुनाफाखोरों की सक्रियता बढ़ जाती है। सिंथेटिक दूध से मावा, मिठाई आदि बनाने के लिए व्यापारी भी इसे प्रयोग करने से गुरेज नहीं करते, क्योंकि इसमें लागत कम और मुनाफा कई गुना ज्यादा होता है। अब शुक्रवार को महाशिवरात्रि और फिर 10 मार्च को होली है, ऐसे में मिलावटखोर सक्रिय होकर अपने काम को अंजाम देने लग गए हैं। अभी से ये धंधा शुरू होगा तो होली तक जारी रहेगा। ऐसे में ये 20 दिन लोगों की सेहत पर भी भारी पड़ सकते हैं।
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दूध में मिलावट तो पहले ही लोगों की सेहत पर भारी थी, सिंथेटिक दूध के बढ़ते धंधे ने हालात और बदतर कर दिए हैं। दूध के कारोबार से जुड़े लोगों का ही दावा है कि जितना जिले में जितना दूध का उत्पादन और आवक है उससे चार गुना ज्यादा खपत है। जाहिर सी बात है कि ये अंतर दूध में पानी मिलाने के साथ-साथ सिंथेटिक दूध बनाकर ही खत्म किया जा रहा है। शुक्रवार को महाशिवरात्रि का त्योहार है। उस दिन भक्त भगवान भोले की पूजा के साथ दुग्धाभिषेक करेंगे। ऐसे में दूध की खपत ज्यादा होगी। होली पर मावा की आपूर्ति पूरी करने के लिए भी सिंथेटिक दूध खपाने की पूरी तैयारी है।
शहर से देहात तक फैले हैं मिलावट के अड्डे
दूध का काला धंधा शहर समेत देहात क्षेत्र तक फैला है। शहर में ही कई स्थानों पर चोरी छिपे मिलावट का धंधा चल रहा है। इसके अलावा उझानी, कादरचौक, दातागंज, बिसौली, बिल्सी आदि क्षेत्रों में भी यह धंधा जोरों पर है। कई जगहों से शहर के लिए दूूध की आपूर्ति होती है जो सुबह ही बड़े बड़े कंटेनरों में भरकर हलवाइयों के यहां पहुंच जाता है। वे अपने उपयोग का दूध निकालकर बाकी को बेच देते हैं।
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मिलाए जाते हैं कई हानिकारक पदार्थ
मिलावट की बात करें तो दूध में पानी ही मिलाया जाता है लेकिन सिंथेटिक दूध बनाने में यूरिया, डिटर्जेंट, कास्टिक सोडा, शैंपू आदि चीजें प्रयोग में लाई जाती है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक होती हैं। दूध में चिकनाई दिखाने के लिए रिफाइंड का प्रयोग किया जाता है। इन चीजों के लगातार पेट में पहुंचने से तमाम प्रकार के रोग पैदा होने लगते हैँ। यदि इनका सेवन ज्यादा हो जाए तो कैंसर की भी संभावना बन जाती है।
पिछली साल के कई सैंपल आए थे फेल
होली पर विभाग ने कई दुकानों से खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए थे, जिनकी हाल ही में आई रिपोर्ट में बर्फी के तीन, खोया के पांच, दूध व क्रीम के तीन तथा पनीर के तीन सैंपल शामिल हैं। खास बात ये है कि इनमें से कुछ शहर की कई नामचीन मिठाई की दुकानों से लिए गए थे।
ऐसे करें सिंथेटिक दूूध की पहचान
आधा कप दूध में बराबर मात्रा में पानी मिलाएं, यदि झाग आए तो दूध में डिटर्जेंट मिला हुआ है।
दूध को हथेलियों के बीच रगड़ें, यादि यह साबुन जैसा लगे तो सिंथेटिक दूध हो सकता है।
गर्म करने पर सिंथेटिक दूध गर्म करने पर हल्का पीला हो जाता है।
सिंथेटिक दूध में कई हानिकारक पदार्थ मिलाए जाते हैं, जो शरीर के भीतर जाकर पाचन सिस्टम को बिगाड़ सकते हैं। यदि लगातार ये पेट में पहुंचते रहें तो आंतों का इन्फैक्शन, अल्सर, पेट दर्द, कोलाइटिस आदि भी हो सकते हैं। ज्यादा सेवन से कैंसर भी हो सकता है। ऐसे में दूध का प्रयोग बहुत देखकर करना चाहिए। त्योहारों पर तो इससे विशेष सावधान रहना चाहिए।
- डॉ. सचिन गुप्ता, फिजिशियन
त्योहारों पर मिलावटखोरों की सक्रियता बढ़ जाती है। विभाग द्वारा समय समय पर अभियान चलाकर मिलावटखोरों पर कार्रवाई की जाती है, लेकिन त्योहारों पर ज्यादा सक्रियता से चेकिंग की रही है। छापा मारने का क्रम लगातार जारी है। यदि कोई कहीं सिंथेटिक दूध की बिक्री या बनाता मिला तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई तय है।
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- चंद्रशेखर मिश्रा, अभिहित अधिकारी
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