अधिकारियों की नजरें नहीं, क्रय केद्रों पर खरीद में हो रहे घोटाले
115 क्रय केंद्रों पर 33,441 एमटी खरीद घोषित, लक्ष्य बहुत दूर
जिले को भले ही गेहूं खरीद का लक्ष्य इतना नहीं था जो हासिल नहीं किया जा सके लेकिन हालात ऐसे बन गए हैं कि गेहूं खरीद का लक्ष्य पाना अब काफी पिछड़ जाएगा। व्याप्त असुविधाओं के चलते सरकारी गेहूं क्रय केंद्रों पर किसान जाना नहीं चाहता और अपनी फसल के नकदीकरण को भुनाने को वह आढ़तियों की शरण में पहुंच चुका है। सरकारी खरीद के प्रति अधिकारियों ने भी अपनी अधिक अभिरुचि नहीं दिखाई है। खरीद एजेंसियां भी बेहद लापरवाह बनी हुई है। इससे आढ़तियों की पौ-बारह है।
जिले की सात एजेंसी 115 क्रय केंद्रों पर खरीद शुरू कर चुकी हैं। एक माह 10 दिन हो जाने के बाद भी अभी तक 33,441 एमटी गेहूं की खरीद हो सकीं हैं। इस खरीद में भी कई केंद्रों पर आढ़तियों और दलालों से जुड़े होने के आरोप लगते रहे हैं। जिले को 1.33 लाख एमटी खरीद का लक्ष्य मिला हुआ है। 15 दिन विलंब से केंद्र खुलने के कारण भी खरीद प्रभावित हुई है। गेहूं का रेट समर्थन मूल्य के करीब 1510 रुपये तक पहुंच जाने के कारण किसानों का रुख आढ़तियों की ओर मुड़ गया। किसानों के आढ़तियों की ओर रुख होते ही आढ़तियों ने मनमाने तरीके से किसानों को कम रेट देना शुरू कर दिए हैं।
गेहूं खरीद में धांधली से भाकियू नाराज
भाकियू और बीकेडी ने गेहूं क्रय केंद्रों पर चल रही धांधली पर आक्रोशित है और कभी भी इस संबंध में अपना आक्रोश प्रकट कर सकती है। किसान बढ़ती लागत और मौसम की मार से पहले ही पीड़ित रहा है। इस बार भी मौसम ने अपना आक्रामक रुख दिखाकर गेहूं का दाना कमजोर कर दिया है। किसान को उसका समर्थन मूल्य न मिल पाने और आढ़तियों पर कोई नियंत्रण न होने के कारण अपनी किस्मत को ही कोस रहा है।
आढ़ती कर रहे जमकर कटौती
आढ़ती भी कटौती कर किसानों का दोहन करने में लगे हैं। गेहूं में नमी के नाम पर या उसमें जौ आदि की मिलावट के नाम पर कटौती की जा रही है। इसमें होना तो चाहिए कि 12 प्रतिशत से कम नमी है तो कोई कटौती न हो लेकिन 12 से 13 प्रतिशत नमी होने पर फुल वैल्यू 14 प्रतिशत कटौती कर ली जाती है। यानि प्रति क्विंटल एक किग्रा, 400 ग्राम कटौती। जौ की मिलावट मिट्टी की मिलावट के नाम पर भी ऐसे ही किसानों को हड़काकर कटौती कर ली जाती है। आढ़ती कटौती के नाम पर किसानों को जो रेट बताते हैं उससे भी कम में खरीद कर रहे हैं।
गेहूं खरीद के लिए केंद्रों पर सभी व्यवस्थाएं सुचारू रखने को कहा गया है। समय-समय पर प्रशासनिक अधिकारी भी निरीक्षण कर रहे हैं। बावजूद इसके किसी खरीद केंद्र से कोई शिकायत मिलती है तो कार्रवाई का भी प्रावधान है। खरीद केंद्रों पर किसानों को निर्धारित सुविधा देने को कहा गया है। सरकारी केंद्रों पर खरीद बढ़ाने के भरसक प्रयास किए जा रहे हैं।
- कौशलेंद्र वर्मा, जिला खाद्य विपणन अधिकारी