खेतों में रसायनिक खादों के प्रयोग से बढ़ रही बीमारियों और खेतों की उरर्वकर क्षमता के क्षरण होने की वजह से एक बार फिर लोग जैविक खेती की ओर लौटना शुरू हो गए हैं। अब जिले में 250 एकड़ जमीन में जैविक खेती की जाएगी। साथ ही किसान अपनी फसलों को किसी भी मार्केट में अपने ट्रेडमार्क के साथ बेंचेगा। तीन सालों के अंदर जिले में जैविक खेती लहलहाना शुरू हो जाएगी। इसके लिए काम शुरू हो गया है।
केंद्र सरकार की कृषि विकास योजनाओं के अंतर्गत वर्ष 2015-16 में जिले में जैविक खेती योजना के तहत 250 एकड़ में जैविक खेती करना शुरू कराया जाएगा। इसके लिए जिले को पांच कलस्टर (समूह) में बांटा गया है। प्रत्येक कलस्टर में 50 एकड़ जैविक खेती कराए जाने का लक्ष्य है। इसमें सदर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले उझानी, कादरचौक, सालारपुर एवं जगत, सहसवान कलस्टर में सहसवान, दहगवां, अंबियापुर, बिसौली कलस्टर में बिसौली, वजीरगंज, इस्लामनगर, आसफपुर एवं दातागंज कलस्टर में दातागंज, समरेर, म्याऊं एवं उसावां ब्लाकों को रखा गया है। इसमें दो सदर क्षेत्र में दो कलस्टरों को रखा गया है।
एक कलस्टर में एक-एक एकड़ वाले 50 किसानों की जमीन को चुना जाएगा। इसके लिए जिले भर के कृषि प्रसार अधिकारियों के साथ उनके क्षेत्रों में जैविक खेती करने के इच्छुक किसानों की सूचना मांगी गई है। सूचना मिलने के बाद किसानों को जैविक खेती के फायदे और उसे करने के तरीकों में बताकर तैयार कराया जाएगा। यह कार्य पहले वर्ष किया जाएगा। किसानों के तैयार होने के बाद दूसरे साल उनके खेतों को जैविक खेती के लिए तैयार किया जाएगा और तीसरे साल फसलों का उत्पादन एवं बिक्री होगी। इससे तीन सालों में कम से कम 250 एकड़ जमीन में किसान जैविक खेती करने लगेगा।
दुकान खरीदने को मिलेगा 1.20 लाख अनुदान
एक कलस्टर पर एक दुकान खोलने की अनुमति विभाग की ओर दी जाएगी, जिससे जैविक खेती करके उगाई गई फसलों की बिक्री के लिए बाजार मिल सके। इसके लिए कृषि विभाग की ओर से 1.20 लाख रुपये का अनुदान भी दिया जाएगा। एक कलस्टर पर केवल एक ही दुकान खोली जा सकेगी। इसके साथ ही किसान अपनी पैदावार को किसी भी मार्केट में बेच सकेगा।
एकदूसरे के खेतों की निगरानी करेंगे किसान
जैविक खेती करने के दौरान किसान प्रकार की रासायनिक खादों का प्रयोग न कर सकें, इसलिए किसान एक दूसरे की फसलों के खेतों की निगारानी करेंगे। यह काम सहभागिता प्रतिपूर्ति प्रणाली (पार्टिसिपेट गारंटी सिस्टम पीजीएस) के तहत किसानों ने इसके प्रपत्र भरवाए जाएंगे, कि वह अपने आसपास के किसानों के खेतों पर नजर रखेंगे कि वह किसी प्रकार के रासायनिक तत्वों का प्रयोग खेती में न कर सके।
कोडिंग, ट्रेडमार्क एवं पैकेजिंग में मिलेगा अनुदान
जैविक खेती से तैयार फसलों को बेचने के लिए किसान अपनी फसल का ट्रेडमार्क ले सकेगा, जिसका एक कोड भी होगा। इसके साथ ही पैकेजिंग एवं लेवलिंग के लिए अनुदान मिलेगा। पैकेजिंग के लिए 2500 रुपये का अनुदान कृषि विभाग की ओर से दिया जाएगा।
250 एकड़ में ऐसे होगी जैविक खेती
जैविक खेती कराने के लिए तमाम नियमों का पालन होगा। सबसे पहले खेत का मृदा परीक्षण किया जाएगा। इसमें जैविक खेती करने वाला किसान न तो किसी रसायन का प्रयोग खेत में करेगा और रासायनिक खादों एवं तत्वों का प्रयोग करने वाले खेतों का पानी भी जैविक खेतों में नहीं आएगा। साथ ही सिंचाईं भी जैविक खेतों में लगे नलकूपों के द्वारा की जाएगी। खाद के लिए हरी खाद, कंपोस्ट खाद आदि का प्रयोग करना होगा। साथ ही जैव उर्वरकों का प्रयोग किया जाएगा। इसके अलावा अन्य कई नियमों का पालन करना होगा।
जैविक खेती की योजना के तहत खेती करने के इच्छुक किसानों की सूची उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारियों को 10 दिनों के अंदर देने के निर्देश दिए गए हैं। किसानों के तैयार होते ही आगे की कार्रवाई पूरा की जाएगी।
-आरपी सिंह, उप कृषि निदेशक