इसी तालाब में डूबकर हुई थी दोनों किशोरों की मौत। संवाद
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दातागंज (बदायूं)। शनिवार दोपहर कोतवाली क्षेत्र के कनेई गांव में जिन चचेरे-तहेरे भाइयों की तालाब में डूबकर मौत हुई। परिवार वालों के मुताबिक वे अच्छे तैराक थे। तालाब में नहाने के दौरान ही उन्होंने तैरना सीखा। उनकी मौत पानी में डूबने से हुई, इस पर किसी को विश्वास नहीं हो रहा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बड़े भाई ने छोटे को बचाने की कोशिश की थी। इसी में दोनों की जान चली गई।
16 वर्षीय कृष्ण गांव के ही जूनियर हाईस्कूल में कक्षा आठ का छात्र था। वह दो भाइयों में बड़ा था। उसके पिता दीनदयाल दिल्ली में मजदूरी करते हैं। करीब 20 दिन पहले ही दीनदयाल धान रोपाई के लिए गांव आया था। तब से वह दिल्ली नहीं गया। अपने खेतों में धान की रोपाई करा रहा था। जबकि 13 वर्षीय अरुण भी उसी स्कूल में कक्षा छह का छात्र था। वह तीन भाइयों में सबसे बड़ा था। उसकी एक बहन है। उसके पिता वीरपाल भी दिल्ली में काम करते हैं। वह इस समय दिल्ली में ही हैं। हादसे की उनको सूचना दे दी गई है।
परिवारवालों के मुताबिक दोनों बच्चे एक-एक साथ स्कूल जाते थे। पढ़ाई-लिखाई, घूमना सब एक साथ करते थे। वे अच्छे तैराक भी थे। अक्सर गांव के तालाब में नहाने के लिए चले जाते थे। गांव के अन्य बच्चे भी नहाने के लिए जाते थे। उनको तैरता देखकर ये दोनों किशोर भी तालाब में तैरना सीख गए। दोनों की पानी में डूबकर मौत हो गई। इस पर परिवारवालों को यकीन नहीं हुआ।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि तालाब में पहले अरुण डूबा था। कृष्ण ने उसे बचाने की कोशिश की। तभी अरुण उसके कंधों पर बैठ गया। इससे कृष्ण पानी में डूब गया। उसके साथ अरुण भी डूब गया। इससे दोनों की मौत हो गई।
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मिट्टी खनन से तालाब में बन गया गड्ढा
ग्रामीणों के मुताबिक शनिवार को जिस तालाब में दोनों किशोरों की डूबकर मौत हुई। वह तालाब नहीं था। वह एक बड़ा गड्ढा था। अक्सर गांव की महिलाएं उस गड्ढे से मिट्टी निकालकर ले जाया करती थीं। इससे ये गड्ढा बड़ा होता चला गया और तालाब जैसा बन गया। यहां पुलिया होने की वजह से पानी भर जाता है और अक्सर गांव के बच्चे यहीं नहाते हैं। संवाद