कोर्ट में मामला विचाराधीन, बाबू ने मोटी रकम लेकर खुलवा दिया था अस्पताल
जिले में मात्र 53 अस्पतालों के ही रजिस्ट्रेशन हैं। करीब चार सौ से अधिक फर्जी अस्पताल संचालित होते आ रहे हैं। इन अस्पताल के संचालकों को रजिस्ट्रेशन नहीं, बल्कि हर महीने बाबू के कमरे में हाजिरी देनी होती है। जिस महीने संचालक नहीं पहुंचता उसी महीने में उसका अस्पताल फर्जी दिखाकर कार्रवाई कर दी जाती है। इसके बाद मोटी रकम लेकर उसे खोल दिया जाता है। बताया जाता है कि बाबू बिना पंजीकृत अस्पतालों से 20 हजार रुपये माह लेता है।
आयुर्वेद की डॉक्टर, संचालित नर्सिंग होम
जिस डॉक्टर को इंजेक्शन लगाने तक का अधिकार नहीं है वह ऑपरेशन करती आ रहीं हैं। अस्पताल को इस तरह से बना रखा है कि जैसे कोई बहुत ही नामचीन अस्पताल हो। अस्पताल के अंदर ही अल्ट्रासाउंड से लेकर सभी जांचें व दवा के लिए मेडिकल स्टोर भी संचालित है। जांच में अस्पताल पूरी तरह फर्जी पाया गया है। उसका सरकारी अभिलेखों में पंजीकरण नहीं है।
सील अस्पताल कैसे खुला, होगी जांच
महिला की मौत की सूचना मिलने के बाद टीम को मौके पर भेजा गया है। अस्पताल बिना पंजीकरण संचालित था, उसे टीम ने सील कर दिया है। एमओआईसी ने आरोपी डॉ. जोहरा फात्मा के खिलाफ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। पहले सील अस्पताल किस आधार पर खुला, इसकी विभागीय जांच कराई जाएगी। - डॉ.रामेश्वर मिश्रा, सीएमओ बदायूं
इस मामले की जांच कराई जाएगी। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। - अवनीश राय, डीएम