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वायरल फीवर से जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं हुई ध्वस्त 19-34-29

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बदायूं। मौसम में हो रहे उतार-चढ़ाव की वजह से रोगियों की तादाद में काफी इजाफा हुआ है। जिला अस्पताल की ओपीडी पहुंचने वाले मरीजों की संख्या 1500 के पार हो गई है। राजकीय मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में भी रोज 1000 से 1200 मरीज पहुंच रहे हैं। सबसे ज्यादा रोगी वायरल, टाइफाइड और सर्दी-जुकाम के हैं, इस कारण दवाओं की भी किल्लत है।
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पिछले एक पखवाड़े से मौसम लगातार करवट बदल रहा है। कभी बारिश तो कभी तेज धूप, कभी रात के तापमान में गिरावट के चलते बीमारियों का प्रकोप बढ़ गया है। मौसम के बार-बार बदलते मिजाज से जिला अस्पताल की ओपीडी आने वाले मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है। आमतौर पर जिला अस्पताल की ओपीडी में 500 से 700 मरीज रोज पहुंचते थे। अब यह संख्या 1500 के पार हो गई है। बुधवार को बारिश होने के बावजूद ओपीडी में 1352 मरीज पहुंचे। राजकीय मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। बीमारियों के सीजन में मरीजों की संख्या बढ़ने की वजह से स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाएं भी चरमराती नजर आ रही हैं।
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पहले से करनी थी व्यवस्था
बारिश के दिनों में बीमारियों बढ़ जाती हैं। वायरल के साथ डेंगू, चिकनगुनिया का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को पहले से व्यवस्थाएं करनी चाहिए थीं। ढुलमुल व्यवस्थाओं का खामियाजा ओपीडी आने वाले मरीज भुगत रहे हैं।
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-विष्णु मौर्य
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संक्रामक को लेकर अलर्ट सिर्फ नाम का
बीमारियों के सीजन से पहले स्वास्थ्य महकमा हर बार अलर्ट जारी कर देता है। बीमारियां शुरू होती हैं तो यह अलर्ट रखे का रखा रह जाता है। अस्पताल में मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। मरीजों को घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है। व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत है।
-ईशू रस्तोगी
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तीन बार लगानी होती है लाइन अस्पताल से दवा लेना टेड़ी खीर है। एक बार पर्चा बनवाने को लाइन में लगना होता है, इसके बाद डॉक्टर को दिखाने के लिए और फिर दवा लेने के लिए दवा स्टोर पर घंटों लाइन लगानी होती है। महिलाओं और बुजुर्गों के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं है।
-निशा सक्सेना
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व्यवस्थाएं दुरुस्त करने को पहले से नहीं दिया ध्यान
बदायूं। जिला अस्पताल प्रशासन ने बीमारियों का सीजन शुरू होने से पहले व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने पर ध्यान नहीं दिया। इसका खामियाजा यहां आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। अस्पताल में दवाओं की किल्लत बनी हुई है। खासकर एंटीबायोटिक, बुखार, दर्द और पेट संबंधी बीमारियों की दवा के लिए मरीजों को भटकना हो रहा है। पर्याप्त दवाएं न होने से ओपीडी आने वाले मरीजों को एक-दो दिन की दवा देकर टरका दिया जाता है।
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स्वास्थ्य समितियों ने ठिकाने लगाया बजट
बदायूं। जिले में कुल 1038 ग्राम सभाएं हैं। प्रत्येक ग्राम सभा को बरसाती सीजन में गांवों में मच्छर नाशक दवाओं के छिड़काव के साथ तालाबों के आस-पास चूना डालने के लिए 10 हजार रुपये का बजट दिया गया था। यह बजट खर्च भी हो गया इसके बावजूद गांवों से संक्रामक रोगी ज्यादा आ रहे हैं।
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जिला अस्पताल में स्टाफ की स्थिति
सृजित पद तैनाती
डॉक्टर- 29 19
पैथोलॉजिस्ट- 02 01
फार्मासिस्ट- 08 04
स्टाफ नर्स- 30 18
एलटी- 12 03
चतुर्थ श्रेणी- 113 98
सिस्टर- 08 04
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विशेषज्ञ की राय-
बीमारियों के सीजन में खासकर बारिश के दिनों में खान-पान के साथ शुद्ध पेयजल का विशेष ध्यान रखना चाहिए। बीमारियों की वजह खान-पान और दूषित पेयजल है। बारिश के दिनों में साफ सफाई के साथ इस बात का भी ध्यान रखें कि घर में आस-पास पानी भी जमा नहीं हो। सर्दी-जुकाम भी वायरल का संकेत हो सकता है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर की सलाह लेना चाहिए।
-डॉ. राजेश वर्मा
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ये बोले, सीएमओ
संक्रामक रोगों के सीजन को देखते हुए जिला अस्पताल में 30 बेड का अतिरिक्त वार्ड बना दिया गया है। संक्रामक रोग नियंत्रण सेल भी काम कर रही है। अगर कहीं से संक्रामक बीमारियों संबंधी खबर मिलती है तो टीम को भेजा जाता है। जिला अस्पताल में भी व्यवस्थाओं को सुधारने को लिखा गया है। एका-एक मरीजों की संख्या में इजाफा होने की वजह से कुछ अव्यवस्थाएं हो रही हैं। इनको जल्द दुरुस्त कर लिया जाएगा।
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-डॉ. नेमी चंद्रा,सीएमओ
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