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यहां लाखों घरों में नही है शौचालय, ओडीएफ का सपना अधूरा

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बदायूं। साल 2012 में कराए गए हाउस होल्ड सर्वे में जिले में दो लाख 27 हजार परिवारों के पास शौचालय नहीं निकले थे। उसके बाद से निर्मल भारत और स्वच्छ भारत अभियान में जिले में कुल लगभग 44 हजार शौचालय ही बनाए जा सके हैं। जाहिर है कि ऐसे में अब भी एक लाख 83 हजार परिवारों के पास शौचालय नहीं हैं। ये आंकड़ा सरकारी है, सच तो इससे भी ज्यादा हो सकता है। ऐसे में, जिले को खुले में शौच मुक्त करने का अभियान सफल नहीं हो पा रहा है। अफसर जिस सच को छुपाते हुए जिले को ओडीएफ बनाना चाहते हैं, वह यह कि जब लोगों के घरों में शौचालय ही नहीं बने हैं तो वे आखिर खुले में शौच के लिए न जाएं तो कहां जाएं? यही सवाल लोग अफसरों से पूछते हैं लेकिन जवाब नदारद है।
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स्वच्छता मिशन के तहत जिले को खुले में शौच मुक्त यानी ओडीएफ करने के लिए 31 दिसंबर 2017 का लक्ष्य रखा गया है। 2012 सर्वे के अनुसार जिले में कुल 422661 परिवार हैं। इनमें 270539 परिवार शौचालय विहीन पए गए हैं। ऐसे में जिले को ओडीएफ कराने के लिए दिसंबर तक सारे घरों में शौचालय बनाए जाने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं शासन की ओर से अब तक पिछले वित्तीय वर्ष को मिला कर केवल दो किस्तों में करीब 37 करोड़ रुपया जारी हुआ है जिससे पूरे जिले में मात्र 30820 परिवारों के लिए शौचालय बनवाए जा चुके हैं। करीब छह हजार शौचालय 2013-2014 वित्तीय वर्ष के बने हुए हैं। कुल मिलाकर अब तक जिले में 35 हजार शौचालय बने है। दूसरी ओर सचिव और प्रधानों का सहयोग न होने की वजह से भी दिक्कतें आ रही हैं, और सी.एल.टी.एस की ट्रेनिंग भी सही तरीके से नही हो पा रही है। इस तरीके से जिले का लक्ष्य पूरा होना मुश्किल दिखाई दे रहा है। स्वच्छता मिशन के तहत जिले को खुले में शौच मुक्त यानी ओडीएफ करने के लिए 31 दिसंबर का लक्ष्य रखा गया है। 2012 सर्वे के अनुसार जिले में कुल 422661 परिवार हैं। इनमें 270539 परिवार शौचालय विहीन पाए गए हैं। इनमें गंगा एक्शन प्लान के तहत गंगा किनारे के छह गांवों में 1068 शौचालय बनवाए जा चुके हैं। इनमें जिले में 9650 शौचालय निर्माण के लिए 115800000 रुपये की धनराशि लाभार्थियों के खाते में भेजी जा चुकी है। वहीं 260889 शौचालय निर्माण के लिए 312 करोड़ रुपये की जरूरत और बताई जा रही है। केंद्र और सरकार के मंत्री और अधिकारी इसको लेकर लगातार बैठकें और समीक्षा कर रहे हैं और समय से लक्ष्य हासिल करने की हिदायत भी दी जा रही है लेकिन लक्ष्य के अनुरूप न तो धनराशि अवमुक्त की जा रही है और न ही लक्ष्य के सापेक्ष कार्य चल रहा है। 9650 शौचालयों का निर्माण कराने के लिए शासन से 11करोड़ 58 लाख की धनराशि और जारी हुई है जिसे जल्द अन्य गांवों में भेजने को सूची बनाई जा रही है। --
किस वर्ष में कितने बने शौचालय वर्ष शौचालय 2012 4000 2013 372 2014 8247 2015 7195 2016 19903 2017 4399 ----------------
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15 सौ शौचालय प्रतिदिन बने तो बने कुछ काम 31 दिसंबर तक जिले को ओडीएफ करने के लिए 260889 शौचालय बनाए जाने हैं। इसके लिए करीब डेढ़ सौ दिन शेष रह गए हैं। ऐसे में प्रतिदिन 1700 शौचालयों का निर्माण कराना होगा, जो काफी मुश्किल काम है। एक शौचालय बनाने में दो मिस्त्री दो दिन लगाते हैं तो प्रतिदिन 3200 राजमिस्त्री चाहिए होंगे।
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सामग्री मिलने में भी दिक्कत खनन में रोक और ओवरलोडिंग पर रोक के चलते मोरंग बालू के रेट काफी बढ़ गए हैं जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण सामग्री मुश्किल से और महंगी मिल रही है जिससे काम में गति नहीं आ पा रही है। --
अब लाभार्थियों के खातों में पहुंच रही है धनराशि पिछली बार स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्राम निधि के खातों में धनराशि भेजी जाती थी, लेकिन इसमें प्रधानों और पंचायत सचिवों द्वारा गड़बड़ी की लगातार मिल रही शिकायतों पर कुछ माह पहले डीएम ने शौचालय निर्माण की धनराशि लाभार्थी के खातों मेें भेजने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में जिन गरीब लाभार्थियों के बैंक खाते नहीं होंगे उन्हें भटकना पड़ेगा और समय से शौचालय निर्माण नहीं हो पाएगा। --
सांसद का गांव भी नहीं हुआ ओडीएफ बदायूं लोकसभा सांसद की ओर से दहगवां ब्लाक का दुर्गपुर जरीफनगर गांव भी ओडीएफ नहीं हो सका है। जबकि दो वर्ष पहले ही इस गांव में 600 शौचालय बनवाने के लिए 12 हजार रुपये प्रति शौचालय के हिसाब से 52,00000 रुपये की धनराशि भेजी जा चुकी है। पंचायत राज विभाग के अफसरों का कहना है कि जरीफ नगर में सीएलटीएस की टीमें ग्रामीणों को समझाने के लिए नही पहुंची हैं। --
दिसंबर तक जिले को ओडीएफ करने का प्रयास गंगा किनारे के जो गांव ओडीएफ हो चुके हैं। उनके लिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं। जो ग्राम प्रधान और सचिव ओडीएफ में सहयोग नहीं कर रहे, उनको भी नोटिस जारी किए जाएंगे। शासन से पैसों को लेकर कोई दिक्कत नहीं है। पैसा भरपूर मिल रहा है। सीएलटीएस के माध्यम से गांवों की टिकरिंग कराई जा रही है। इसके लिए पूरे 17 टीमें बनाई गई हैं। इनमें हर टीम में पांच सदस्य है, जो एक-एक ब्लाक के गांवों में जाकर ग्रामीणों को खुले में शौच मुक्त के लिए समझा रहे हैं। जिले में शौचालय निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है। प्रतिदिन इसकी समीक्षा भी की जा रही है। शासन से मिल रही धनराशि के अनुरूप समय से कार्य पूरा कराने का प्रयास किया जा रहा है।
-अनिता श्रीवास्तव, जिलाधिकारी
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प्रधानों को ओडीएफ करने के लिए दिया प्रशिक्षण
बदायूं। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत विकास खंड म्याऊं, कादरचौक एवं उसावां के ग्राम प्रधानों को ओडीएफ के संबंध में एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में उपस्थित महिला प्रधानों की संख्या को देखकर डीएम ने कहा कि आज महिला प्रधानों की उपस्थिति यह दर्शा रही है कि हम जनपद को दिसंबर के स्थान पर अक्तूबर तक ओडीएफ कर देंगे। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि जब तक शौचालय घर में न बन जाए, घर के मुखिया के विरुद्ध अनशन छेड़ दें क्योंकि इस प्रथा का सर्वाधिक दुख महिलाओं को भोगना पड़ता है। उन्होंने ओडीएफ घोषित ग्राम प्रधान राजेश कुमार कोतल नगला, अल्लानूर सैदपुर, हामिदा खातून उरौलिया, केसरी अब्बू नगर एवं जगवीर सिंह सिठौलिया पुख्ता को प्रशस्ति पत्र, प्रतीक चिह्न व शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। ग्राम प्रधान सत्य निरूपण ग्राम पंचायत बोंदरी ने कहा कि हम बिना सरकारी सहायता के 15 दिन में ग्राम को ओडीएफ करा देंगे। जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी की ओर से उन्हें माला पहनाकर सम्मानित किया गया। प्रशिक्षण में डीपीआरओ, अब्दुल अहद जांबाज आदि मौजूद रहे।
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