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सावधान! मिलावट की ‘मार’ से हो सकते हैं बीमार

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बदायूं। कहते हैं कि हर चमकने वाली चीज सोना नहीं होती और बात अगर खाने-पीने की चीजों की हो तो ये बात सौ फीसदी सही साबित होती है। इन चीजों में मिलावट करने वाले लोग इतनी सफाई से मिलावट करते हैं कि आम आदमी को इनकी पहचान करना टेड़ी खीर होता है। त्योहार आते ही ये मिलावटखोर और ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं। मिलावट का धंधा जोर पकड़ने लगता है। होली रंगों के साथ-साथ खानपान का त्योहार भी है, ऐसे में ये मिलावटखोर बड़े पैमाने पर एक माह पहले से ही अपना धंधा शुरू कर देते हैं। त्योहार आते-आते ऐसी चीजें इतनी बहुतायत में बाजार में आ जाती हैं, कि लोग इन्हें खरीदने पर मजबूर हो जाते हैं। ऐसे में सावधान रहने की जरूरत है क्योंकि खाने की चीजों में मिलावट अस्पताल तक भी पहुंचा सकती है। ऐसे में खाद्य पदार्थों की खरीदारी के समय थोड़ी सी जानकारी लोगों को बीमार होने से बचा सकती है। 
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त्योहारों का समय नजदीक आते ही मिठाई की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में मांग को पूरा करने के लिए मिलावटखोर मुनाफे के लालच में लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने से भी नहीं चूकते हैं। होली में दूध और खोवे की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। उसकी कमी को पूरा करने के लिए भी दुकानदार भी इन मिलावटखोरों से समझौता कर लेते हैं। संबंधित विभाग भी त्योहार आने पर चेकिंग के नाम पर खानापूर्ति करके अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं। ऐसे में थोड़ी सी सावधानी रखकर लोग स्वयं ही मिलावट का पता लगा सकते हैं। 
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सिंथेटिक मावा सबसे घातक
यूरिया, रिफाइंड, माल्टा, फारमोलिन, सफेदी आदि के घोल से सिंथेटिक दूध बनाया जाता है। इस दूध से पाउडर बनता है। इस तरह सिंथेटिक पाउडर, दूध, चिकनाई के लिए रिफाइंड, पाम ऑयल, सूजी आदि की सहायता से मावा बनाया जाता है। इस मावे से त्योहार आते ही मिठाई बनाने का धंधा शुरू हो जाता है। ऐसे में ऐसे मावे से सावधान रहने की जरूरत है।
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ऐसे करें पहचान 
दूध: आधा कप दूध में बराबर मात्रा में पानी मिलाएं, यदि झाग आए तो दूध में डिटर्जेंट मिला हुआ है।
- दूध को हथेलियों के बीच रगड़ें, यादि यह साबुन जैसा लगे तो सिंथेटिक दूध हो सकता है। 
- गर्म करने पर सिंथेटिक दूध हल्का पीला हो जाता है।
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मावा: मावे को अंगूठे के नाखून पर रगड़ें। यदि यह असली है तो इसमें से घी की महक आएगी और खुशबू देर तक रहेगी। 
- हथेली पर मावे की गोली बनाएं। अगर यह फटने लग जाए तो समझ लें कि मावा नकली है या इसमें मिलावट की गई है। 
- मावे में थोड़ी चीनी डालकर गरम करने पर अगर यह पानी छोड़ने लगे तो नकली है। 
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घी: घी में कुछ बूंदे आयोडीन टिंचर की मिलाने पर यदि रंग नीला हो जाए तो घी में आलू, शकरकंदी या अन्य स्टार्च मिलाया गया है।
- एक चम्मच घी में एक चम्मच हाइड्रोक्लोरिक एसिड और एक चुटकी चीनी मिलाएं। अगर घी का रंग लाल हो जाए तो इसमें वनस्पति घी की मिलावट है।
 - थोड़ा सा घी हाथों में रगड़ें। इसे करीब 15 मिनट बाद सूंघकर देखें अगर खुशबू आनी बंद हो जाए तो मान लीजिए कि यह मिलावटी घी है। --
बेसन: कांच के गिलास में थोड़ा सा बेसन लें और उसमें थोड़ा सा पानी डालें, फिर उसमें हाइड्रोक्लोरिक एसिड (एचसीएल) की चार से पांच बूंदे डालें, एसिड डालते ही जामुनी रंग आए तो समझें कि बेसन मिलावटी है। 
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डॉक्टर की राय
त्योहार के दिनों में बिकने वाली मिठाई आमतौर पर कई दिन पहले बना ली जाती है। इतना ही नहीं उसे फ्रेश दिखाने और कलर करने के लिए केमिकल का भी इस्तेमाल किया जाता है, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। मिलावटी खाद्य पदार्थ भी जमकर बिकते हैं। बेहतर होगा कि इस प्रकार की चीजों का परीक्षण करने के बाद ही उनका प्रयोग किया जाए, क्योंकि इनके सेवन से डायरिया, फूड प्वॉयजनिंग और पेट संबंधी अन्य बीमारियां भी हो सकती हैं। कोशिश करें कि कम से कम मिठाई का उपयोग किया जाए।
- डॉ. मोहित यादव, फिजीशियन, जिला अस्पताल
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होली का त्योहार नजदीक है। जिले में कहीं पर भी मिलावटी सामान बिकने नहीं दिया जाएगा। इसके लिए टीम का गठन कर दिया गया है जो लगातार दुकानों पर छापा मारेगा। मिलावटी सामान पाए जाने की दशा में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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-चंद्रशेखर मिश्रा, अभिहीत अधिकारी
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