बदायूं। कोरोना काल के दौरान जिले में कई बच्चे अनाथ हो गए थे। ऐसे बच्चों की पढ़ाई में मदद करने का जिम्मा प्रदेश सरकार ने लिया था। इसके तहत अभी तक जिले में 63 बच्चों को ही योजना लाभ मिला। जबकि 43 बच्चों को अब तक लाभ नहीं मिल सका है। टीम द्वारा अभी तक इन बच्चों की फाइल स्वीकृति नहीं हो सकी है। ऐसे में यह बच्चे योजना का लाभ पाने से अभी वंचित रहे गए हैं।
उप्र सरकार द्वारा मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोरोना/ सामान्य) को संचालित किया जा रहा है। इसके तहत माता-पिता या दोनों में से किसी एक की कोरोना वायरस संक्रमण के कारण मृत्यु हो गई है। उनको राज्य सरकार द्वारा योजना के तहत चार हजार रुपये दिए जाने हैं। जिले में 63 बच्चे ऐसे मिले, जिनके माता-पिता या इनमें से एक की मृत्यु कोविड से हो गई है। ऐसे में जिला बाल संरक्षण विभाग की ओर से 63 बच्चों की फाइल स्वीकृति के बाद में इनको धनराशि दी गई है। हालांकि 23 बच्चों को दूसरी बार ये धनराशि दी गई है, जबकि 40 बच्चों को इसी माह पहली बार धनराशि दी गई है। वहीं 43 बच्चे ऐसे मिले हैं जिनके माता-पिता या किसी एक की मृत्यु (सामान्य कारण) से एक फरवरी 2020 के बाद में हुई है। उनको प्रदेश सरकार की ओर से 25 सौ रुपये माह दिए जाने हैं, लेकिन पिछले कई दिनों से इन बच्चों की फाइल स्वीकृति के लिए कार्यालयों के घूम रही है। फाइल को अभी तक अनुमोदन नहीं मिल पाया है। ऐसे में ये बच्चे सरकारी योजना का लाभ पाने के लिए भटक रहे हैं।
शासन से मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना संचालित की जा रही है। इसके तहत कोरोना के कारण जिन बच्चों के माता-पिता या इनमें से एक की मृत्यु हुई है, ऐसे 63 बच्चे मिले हैं, उनको धनराशि दी जा चुकी है। वहीं कोरोना काल में किसी अन्य वजह से बच्चों के माता-पिता या इनमें एक की मौत हुई है। ऐसे में 43 बच्चे मिले हैं। इनको जल्द ही योजना का लाभ मिल जाएगा। - प्रीति कौशल, बाल संरक्षण अधिकारी