बदायूं। नीलकंठ महादेव और जामा मस्जिद से जुड़े पुराने वाद में मंगलवार को सिविल जज सीनियर डिवीजन की कोर्ट में सुनवाई हुई। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने करीब 20 मिनट तक अपने-अपने तर्क रखे। मुस्लिम पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए निचली अदालत में मामले की सुनवाई पर रोक लगाने की मांग की गई। इस पर अदालत ने इंतजामिया कमेटी के अधिवक्ताओं से सुप्रीम कोर्ट का लिखित आदेश प्रस्तुत करने को कहा। अब मामले में अगली सुनवाई 13 अगस्त को होगी।
मंगलवार को जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी की ओर से दो अधिवक्ता अदालत पहुंचे। वहीं नीलकंठ महादेव पक्ष की ओर से चार अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा। मामला वर्ष 2022 में अदालत पहुंचा था। हिंदू पक्ष का दावा है कि वर्तमान जामा मस्जिद स्थल पर पहले नीलकंठ महादेव मंदिर था। वहीं, मुस्लिम पक्ष इन दावों को खारिज करते हुए स्थल पर हमेशा से मस्जिद होने की बात कही। वाद की सुनवाई योग्य होने पर भी सवाल उठाए। मामले में एएसआई की रिपोर्ट पहले ही अदालत में दाखिल हो चुकी है। मुस्लिम पक्ष की ओर से बहस जारी है।