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शिक्षामित्रों ने मांगी भीख, जाम भी लगाया

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बदायूं। समायोजन रद्द होने से खफा शिक्षामित्रों ने बेमियादी आंदोलन के चौथे दिन शनिवार को भीख मांगी। पुलिस लाइंस चौराहे पर जाम भी लगाया। प्रदर्शनकारी शिक्षामित्रों का कहना था कि सरकार ने कलम छीनकर उन्हें कटोरा थमा दिया है, लेकिन वह कलम हासिल करके ही पीछे हटेंगे। जनसमर्थन हासिल करने को आंदोलनकारी शिक्षामित्रों ने शहर के कई रास्तों से जुलूस निकाला। कई थानों की पुलिस फोर्स उन पर नजर रखे रही। सुप्रीम कोर्ट की ओर से सहायक अध्यापक पद का समायोजन रद्द कर दिए जाने से पूरे प्रदेश में शिक्षामित्र आंदोलन कर रहे हैं। शुक्रवार को आंदोलनकारी शिक्षामित्रों ने शहर में झाड़ू लगाकर प्रदर्शन किया था। शनिवार को भी सैकड़ों की तादाद में आए शिक्षामित्रों ने पहले मालवीय आवास पर धरना-प्रदर्शन किया फिर सरकार की ओर से कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाने पर जमकर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। इस दौरान शिक्षामित्रों ने कहा कि वे सरकार की गलत नीतियों के कारण आज भीख मांगने को मजबूर हैं, लेकिन वे खामोश बैठने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही कोई फैसला उनके हित में नहीं लिया तो गंभीर परिणाम भी होंगे। धरने के बाद सभी हाथों में कटोरा लेकर निकल पड़े। भीख मांगते हुए शिक्षामित्र डीएम चौराहा, पुलिस लाइंस चौराहा होते हुआ अंबेडकर पार्क पहुंचे। इस बीच रास्ते में पुलिस लाइंस चौराहे पर जाम भी लग गया। पुलिस के काफी समझाने पर जाम खुल सका। यहां पर शिक्षामित्र अपने हित के लिए सरकार से नियमों में संशोधन करने की भी मांग कर रहे थे।
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प्रदर्शनकारी शिक्षामित्रों में मोहम्मद जिलानी, विनोद राठौर, रविंद्र यादव, विनय कुमार सोलंकी, चरन सिंह, निर्भान सिंह, सतीश चंद्र गुप्ता, राजीव कुमार सिंह, कुंवरपाल यादव, विनोद सक्सेना, रामपाल यादव, मधु, अवनीत सक्सेना, विनोद राठौर, राहुल रस्तोगी, अभिषेक, तेजेंद्र, आवेंद्र, फुरकान, बाबू सिंह, वीरवाला, सुमगंला, रश्मि, सीमा रानी, कुमुद, अनुराग यादव, जयपाल, राजेश, मुनेंद्र पाल सिंह, मधुरानी आदि प्रमुख रहे।
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पुलिस कर्मियों से भी भीख मांगी
बदायूं। जिस वक्त शिक्षामित्र शहर के रास्ते से गुजरते हुए भीख मांग रहे थे तभी कुछ शिक्षामित्रों ने उनकी सुरक्षा में साथ चल रहे इंसपेक्टर सिविल लाइंस राजीव कुमार शर्मा से भी भीख मांगी। इस पर इंसपेक्टर हंसने लगे, लेकिन उन्हें भी शिक्षामित्र को भीख देने पड़ी। साथ मे चल रहीं कई सिपाही भी शिक्षामित्रों से नहीं बच सकें। उन्हें भी पैसे देने पड़े। कई शिक्षामित्रों ने हाईवे पर जाम लगा दिया। महिला शिक्षा मित्रों का कहना था कि बिना भीख दिए वह किसी वाहन को नहीं निकलने देंगी। सीओ, एसओ के साथ भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था।
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लगातार नजर रखे है पुलिस
बदायूं। सावन का चौथा सोमवार 31 जुलाई को है। सो कछला से गंगाजल लाने के लिए बदायूं जिले के साथ ही बरेली और आसपास जिलों के भारी संख्या में कांवड़िये आ रहे हैं। इस रास्ते से कांवडियां गुजरते हैं उसी रास्ते पर मालवीय आवास है। शिक्षामित्र भी रोजाना धरना-प्रदर्शन को सड़क पर निकल रहे हैं। ऐसे में पुलिस के सामने गंभीर समस्या आ गई है। लिहाजा, अभी तक शिक्षामित्रों ने शालीनता का परिचय दिया है और पुलिस भी उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखे हुए है। हालांकि देखा गया है कि जिस समय कांवड़ियों का जत्था इधर से गुजरता है, उस समय शिक्षामित्र खामोश रहते हैं।
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स्कूल बंद होने से विभागीय अधिकारियों में है राहत
बदांयू। कांवड़ियों के मद्देनजर जिले भर के स्कूल-कॉलेज सोमवार तक को बंद कर दिए गए हैं। डीएम के आदेश से स्कूलों के बंद होने से बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने राहत की सांस ली है। वजह यह है कि विभागीय अधिकारियों को ऐसी सूचनाएं मिल रहीं थीं कि कई स्थानों पर शिक्षामित्र स्कूलों को जबरन बंद करा रहे हैं।
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शिक्षामित्र बोले-सरकार तय करे उनका भविष्य
बदायूं। धरना स्थल पर वक्ताओं ने कहा कि सरकार की तरफ से अपर मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को आदेश जारी किए हैं कि समायोजित शिक्षक अपने विद्यालय में जाकर शिक्षण कार्य कराएं। इस पर वक्ताओं ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि वह किस पद पर काम करेंगे, जब तक सरकार इस बात का एलान नहीं करती कि वह उन्हें किस पद पर रखा जाएगा, तब तक वह आंदोलन जारी रखेंगे।
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विधायक बोले- शिक्षामित्रों का हित सुरक्षित रहेगा
बदायूं। अपनी मांग को पूरा कराने के लिए आंदोलित शिक्षामित्रों ने सदर भाजपा विधायक महेश चंद्र गुप्ता को मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन दिया। इस दौरान विधायक ने शिक्षामित्रों को आश्वस्त किया कि सरकार उनके मान-सम्मान की पूरी रक्षा करेगी। इसके लिए सरकार काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शिक्षामित्रों की स्थिति से अवगत करा दिया गया है, वह इस पर विचार विमर्श कर जल्द कुछ न कुछ समाधान निकालेंगे। ------------
क्या कहते हैं शिक्षामित्र
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टीईटी पास को क्यों किया बर्खास्त पूर्व में समायोजित शिक्षकों में लगभग 40 फीसदी ऐसे हैं, जिन्होंने शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है उन्हें बर्खास्त नहीं किया जाना चाहिए। सरकार को उनके हित में फैसला लेना चाहिए।
-ब्रजलाल निवासी दहगंवा --
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हमने भी वर्ष 2013 में टीईटी उत्तीर्ण कर ली थी, लेकिन फैसले से सभी समायोजित शिक्षामित्र प्रभावित हुए हैं, जो टीईटी उत्तीर्ण हैं उन्हें शिक्षक के पद पर बनाए रखना चाहिए।
-विनीत कुमार निवासी दहगवां --
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सरकार ने नियमानुसार शिक्षामित्रों का समायोजन किया था। उन्हें पत्राचार के जरिए बीटीसी भी कराई इसलिए सरकार को चाहिए वह टीईटी पास शिक्षामित्रों को पूर्व की तरह शिक्षक के पद पर बनाए रखने को सार्थक पहल करे।
-अकबर निवासी ओरछी .......
जिस तरह केंद्र सरकार ने जीएसटी को लागू कराने के लिए संसद में विधेयक लाकर उसे पास कराया इसी तरह लाखों शिक्षामित्रों के भविष्य को देखते हुए उसे संसद में विधेयक पास कराकर सहायक अध्यापक बनाए रखे।
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-सीमा रानी, बीधानगला
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