फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भाई के प्यार में बारिश में भीगती रहीं बहनें

विज्ञापन
विज्ञापन
बदायूं। रक्षाबंधन का त्योहार, ऊपर से बारिश, वह भी ऐसी कि थमने का नाम नहीं ले। बहनें जेल में बंद भाइयों को राखी बांधने के इंतजार में कई घंटे लाइन में खड़ी भीगती रहीं। दर्जनों बहनें बाहर प्रतीक्षालय में इंतजार करती रहीं। इसके बावजूद उनके कदम नहीं डगमगाए।
विज्ञापन

रविवार सुबह से शुरू हुई बारिश लोगों के लिए मुसीबत बनी होगी लेकिन भाई से मिलने के लिए बहनों के कदम नहीं रोक पाई। जिला कारागार में सुबह साढ़े नौ बजे से मुलाकात शुरू हो गई थी। परंतु जेल में बंद बंदियों और कैदियों की बहनों ने सुबह सात बजे से ही जिला कारागार पहुंचना शुरू कर दिया। नौ बजे तक दर्जनों बहनों की लाइन लग गई। उस वक्त बहनों में सिर्फ भाई से मिलने की चाह थी। सुबह से हो रही बरसात में वे पूरी तरह भीग चुकी थीं। इसके बावजूद कहीं आड़ लेने को उनके कदम लाइन से नहीं हट रहे थे। कुछ बहनों के पास छाता था, लेकिन बाकी बहनें ऐसे ही बारिश की मार झेलती रहीं। उनकी आंखों में भाई से मिलने की ललक और आंसू दिखाई दिए।

1050 बहनों ने बांधी राखी
जिला कारागार में रविवार को राखी बांधने के लिए 1050 बहनें पहुंची। उन्होंने 682 बंदियों को राखी बांधी। 1050 बहनों की मुलाकात भी 12 शिफ्ट में कराई गई। सुबह साढ़े नौ बजे पहली शिफ्ट अंदर भेजी गई। उसके बाद करीब 45 मिनट के अंतराल से बाकी शिफ्ट में बहनों को भेजा गया। शाम करीब 05:15 बजे तक मिलाई कराई गई।
विज्ञापन


बरसात के बावजूद खुले में कराई गई मुलाकात
रविवार सुबह से लेकर शाम तक बरसात लोगों के लिए मुसीबत बनी रही। इससे शायद ही कोई अंजान होगा। जेल प्रशासन भी बरसात से अंजान रहा और बहनों की भाई से मुलाकात खुले में कराई गई, जिससे बहनों को बरसात में भीगते हुए भाई को राखी बांधनी पड़ी। उनकी मिठाई और सामान तक पानी में भीग गया। बहनों के कपड़े भी खराब हो गए।

भाई को देखकर रो पड़ीं बहनें
रक्षा बंधन के दिन जिला कारागार में राखी बांधते हुए कई बहनों के आंसू छलक आए। एक बंदी तो एक दिन पहले ही जेल आया था। उसकी बहन राखी बांधने के समय भगवान से यही सवाल कर रही थी कि एक दिन भी भाई को जेल जाने से नहीं रोक सके जिससे वह अपने घर पर राखी बांध सकती।
विज्ञापन


 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें