राज्यसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ज्यादातर नए चेहरे पर दांव लगाएगी। उत्तराखंड में बंसल को दोबारा मौका नहीं मिलेगा। बंगाल में भाजपा टीएमसी की बागी रुक्मिणी पर भरोसा जताएगी। पार्टी सूत्रों ने बताया कि इस बार भी जातीय समीकरण पहले जैसा ही होगा, मगर ज्यादातर चेहरे बदल जाएंगे।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पूर्व दस सीटों पर होने जा रहे राज्यसभा चुनाव में भाजपा सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए ज्यादातर नए चेहरे पर दांव लगाएगी। उत्तराखंड की इकलौती सीट पर भी भाजपा वर्तमान सांसद नरेश बंसल की जगह राज्य के कद्दावर नेता को उम्मीदवार बनाएगी।
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उत्तर प्रदेश में पार्टी की योजना वर्तमान आठ सांसदों में से कम से कम पांच सांसदों को दोबारा मौका नहीं देने की है। इनमें से एक दिनेश शर्मा पहले ही उपराज्यपाल बनने के कारण सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं।
पार्टी सूत्रों ने बताया कि इस बार भी जातीय समीकरण पहले जैसा ही होगा, मगर ज्यादातर चेहरे बदल जाएंगे। वर्तमान में आठ सांसदों में 4 अगड़ा, दो ओबीसी, एक अल्पसंख्यक और एक एससी बिरादरी से हैं।
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इस बार भी समीकरण करीब-करीब यही रहेगा। हां, ओबीसी में पैठ बढ़ाने की रणनीति के मद्देनजर यह संख्या दो से बढ़ा कर तीन की जा सकती है। राजपूत बिरादरी के दोनों चेहरे बदले जाएंगे, जबकि ब्राह्मण बिरादरी से भी नए चेहरे को मौका मिलेगा।
तीन को मिल सकता है दोबारा मौका
एससी बिरादरी के पूर्व डीजीपी बृज लाल, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा को दोबारा मौका दिया जा सकता है। पुरी की मध्य एशिया, अमेरिका में अच्छी पकड़ है और उन्हें प्रधानमंत्री का करीबी माना जाता है।
इसी प्रकार बृज लाल दलित बिरादरी से तो बीएल वर्मा ओबीसी बिरादरी से हैं। विधानसभा चुनाव में भाजपा जीत की हैट्रिक लगाने के लिए इन्हीं बिरादरी को साधे रखना चाहती है।
भाजपा जस का तस, सपा को लाभ, बसपा शून्य
विधानसभा में संख्या बल की दृष्टि से राज्य की दस सीटों में से दो सपा को और आठ भाजपा को जाएगी। सपा का प्रतिनिधित्व लोकसभा, विधानसभा के बाद राज्यसभा में भी शून्य हो जाएगा। राज्य में एक सीट जीतने के लिए 37 विधायकों की जरूरत है।
तीन निर्दलीय, राजाभैया के दो विधायकों के साथ और राजभर के दो विधायकों के बागी रुख के कारण राजग का संख्याबल 292 है। ऐसे में उसे आठवीं सीट जीतने के लिए चार अतिरिक्त वोट की जरूरत होगी।
उत्तराखंड में नए चेहरे की तलाश
उत्तराखंड में वर्तमान सांसद नरेश बंसल का कार्यकाल पूरा हो रहा है। पार्टी यहां भी नए चेहरे को मौका देगी। सूत्रों का कहना है कि विधानसभा चुनाव के मद्देनजर नेतृत्व की योजना किसी कद्दावर नेता को मैदान में उतारने की है, जिससे चुनाव के समीकरण साधे जा सकें।