2014 में नरेंद्र मोदी के सहारे सत्ता पाने की कोशिश में जुटी भाजपा ने एक बार फिर राम मंदिर का राग छेड़ दिया है। इस बार इस मुद्दे को गरमाया है उत्तर प्रदेश के भाजपा प्रभारी अमित शाह ने। जानिए, भाजपा के लिए इस रामबाण के मायने
-भाजपा की सीधी मंशा धर्म-आधारित ध्रुवीकरण की है। यूपी में भाजपा का लक्ष्य कम से कम 45 सीटें जीतने का है। जाहिर है, ध्रुवीकरण को पार्टी ताकत बनाना चाहती है।
-जातीय सियासत देश की हकीकत है। दलित, अगड़े-पिछड़े, अति-पिछड़े और अगड़ों में भी कई जातियों में बंटे समाज को हिंदुत्व के नाम पर अपने पक्ष में एकजुट करने की कोशिश करेगी भाजपा।
-संगठनात्मक स्तर पर पार्टी लगातार पिछड़ती रही है, ऐसे में उसे भावनात्मक मुद्दे का ही आसरा है।
हमने राम लला से मांगा है कि देश में जल्दी सुशासन स्थापित हो। देश कांग्रेस से मुक्त हो। यह भी प्रार्थना की है कि हम सब मिलकर यहां जल्द से जल्द भव्य मंदिर का निर्माण करें और रामलला को उनके स्थान पर विराजमान करें।
अमित शाह, यूपी के भाजपा प्रभारी
बाकी दल भड़के, बोले चुनाव के वक्त याद आता है मंदिर
भाजपा और उसके मातृ संगठन आरएसएस दोनों की कार्यप्रणाली सांप्रदायिकता का जहर फैलाने की है। प्रदेश बाबरी मस्जिद के ध्वंस के रूप में उसकी राजनीति की बानगी देख चुकी है।
भाजपा शासन में मुस्लिमों के नरसंहार की कहानियां आज भी रोमांच पैदा करती है। उसका चरित्र संविधान विरोधी और अलोकतांत्रिक है।
राजेंद्र चौधरी, प्रवक्ता, समाजवादी पार्टी
इसके पुख्ता प्रमाण हैं कि मुलायम और भाजपा अंदर से मिले हुए हैं। भाजपा को पूरा भरोसा है कि लोकसभा चुनाव के पहले वह सपा के साथ मिलकर धार्मिक उन्माद पैदा क रने में कामयाब हो जाएगी।
मुलायम ने आडवाणी की जमकर तारीफ की थी और यहां तक कह दिया था कि आडवाणी कभी झूठ नहीं बोलते।
बेनी प्रसाद वर्मा, केंद्रीय मंत्री व कांग्रेस नेता