उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में हिंसा भड़काने के आरोप में भारतीय जनता पार्टी के एक और विधायक सुरेश राणा पर भी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगा दी है।
दो दिन पहले ही भाजपा विधायक संगीत सिंह सोम पर भी रासुका लगाया गया था। विधायक संगीत सोम जहां उरई जेल और वहीं सुरेश राणा बांदा जेल में बंद हैं।
मुजफ्फरनगर के जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा के अनुसार सुरेश राणा पर हिंसा भड़काने के अलावा कई गंभीर आरोप हैं।
इन्हीं आरोपों के कारण दोनों विधायकों पर रासुका लगाया गया है। संगीत सोम मेरठ जिले के सरधना क्षेत्र से विधायक हैं जबकि सुरेश राणा मुजफ्फरनगर जिले के थानाभवन क्षेत्र से विधायक हैं।
भाजपा विधायक संगीत सोम को फर्जी वीडियो एवं भडकाऊ भाषण देने के आरोप में 21 सितम्बर और सुरेश राणा को 20 सितम्बर को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया था।
भाजपा विधायकों के अलावा दंगा भड़काने के आरोप में बहुजन समाज पार्टी के विधायक नूर सलीम राणा को भी गिरफ्तार गया था। नूर सलीम राणा को मिर्जापुर जेल में रखा गया है।
यूपी सरकार से सुप्रीम कोर्ट का जवाब तलब
उच्चतम न्यायालय ने मुजफ्फरनगर हिंसा के लिए जिम्मेदार घटनाओं की स्वतंत्र जांच कराए जाने संबंधी याचिका पर आज राज्य सरकार से जवाब तलब किया।
मुख्य न्यायाधीश पी सदाशिवम, न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई और न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की खंडपीठ ने निजी चैनल के द्वारा किए स्टिंग ऑपरेशन पर राज्य सरकार से जवाब तलब किया।
इस स्टिंग आपरेशन में यह दिखाया गया है था कि पुलिस ने हिंसा पर नियंत्रण के लिए समय पर त्वरित कार्रवाई नहीं की थी।
न्यायालय ने कहा कि वह मुजफ्फरनगर की स्थिति के बारे में अवगत है और जरूरत पड़ने पर दिशा-निर्देश जारी करेगा।
खंडपीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लंबित एक जनहित याचिका को अपने यहां स्थानांतरित करने का निर्देश भी दिया।
इस बीच मामले की सुनवाई के दौरान केंद और राज्य सरकार एक दूसरे का समर्थन करती नजर आई। केंद, ने खंडपीठ को आश्वस्त किया कि वह राज्य सरकार को हर प्रकार की सहायता करने को लेकर प्रतिबद्ध है।
इस माह के प्रारंभ में न्यायालय ने कहा था कि वह मुजफ्फरनगर दंगे की जांच तथा राहत और पुनर्वास कार्यों की निगरानी अंत तक जारी रखेगा।