वेतन भुगतान के दावे को बताया गलत
बिजनौर। जिले के वित्त विहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को वेतन भुगतान के मामले को मुख्यमंत्री के जनता दरबार में उठाने की तैयारी है। वेतन भुगतान के दावे को लेकर जिला अभिभावक संघ व डीआईओएस कार्यालय आमने-सामने है। संघ का दावा है कि शासन को वेतन भुगतान को लेकर गलत तथ्य दिए जा रहे हैं, जबकि डीआईओएस का कहना है कि जिन वित्तविहीन विद्यालयों में छात्रों से पूरी फीस ली गई है वहां शिक्षकों को वेतन भुगतान हो गया है।
जिले में यूपी बोर्ड के 282, सीबीएसई बोर्ड के 102 तथा आईसीएसई बोर्ड के 10 इंटर व हाईस्कूल कालेज हैं। 394 विद्यालयों में करीब 5000 शिक्षक पढ़ाते हैं। वित्तविहीन शिक्षकों को वेतन भुगतान नहीं होने का मामला शासन तक पहुंचा था। शासन ने मामले को गंभीरता से लिया था। जिस पर डीआईओएस को शिक्षकों को वेतन भुगतान को लेकर पांच बिंदुओं पर विद्यालयों से रिपोर्ट मांगी गई थी।
डीआईओएस कार्यालय के अनुसार 22 सितंबर तक सूचना मांगी थी। डीआईओएस राजेश कुमार का कहना है कि विद्यालयों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार जिन विद्यालयों ने छात्रों से पूरी फीस ली है उन विद्यालयों के शिक्षकों को वेतन भुगतान कर दिया गया है। बताया कि विद्यालयों ने बताया है कि उन्हें छात्रों से पूरी फीस नहीं मिली है। डीआईओएस ने कहा कि कुछ विद्यालयों के शिक्षकों ने उनसे शिकायत की थी कि उन्हें विद्यालय से नौकरी से हटा दिया है तथा वेतन नहीं दिया है। इस पर विद्यालयों से कहा गया था कि शिक्षकों ने जब तक पढ़ाया है उन्हें उस अवधि का वेतन दिया जाए। रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है।
अभिभावक संघ के जिलाध्यक्ष नृपेंद्र देशवाल का आरोप है कि विद्यालयों द्वारा शिक्षकों को वेतन देने का दावा गलत एवं भ्रामक है। वित्तविहीन स्कूल शासन व अधिकारियों को गुमराह कर रहे हैं। कहा कि छात्रों से स्कूल बंद रहने के समय की भी फीस वसूली गई है। आरोप है कि विद्यालयों ने अनेक शिक्षकों को स्कूल से निकाल दिया है, जबकि विद्यालयों में छात्रों की संख्या भी कम नहीं हुई है तथा छात्रों से पूरी फीस भी ली जा रही है।
मामले को मुख्यमंत्री के दरबार तक ले जाएंगे
अभिभावक संघ के जिलाध्यक्ष नृपेंद्र देशवाल ने कहा है कि शिक्षक समाज व छात्रों का भविष्य निर्माता है। शिक्षकों को वेतन नहीं मिलना गंभीर मामला है। शिक्षक का भी परिवार है। अभिभावक संघ मामले में चुप नहीं बैठेंगे। वेतन प्रकरण को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दरवाजा खटखटाया जाएगा। संघ वित्तविहीन शिक्षकों के साथ मुख्यमंत्री के जनता दरबार में मामला उठाएगा। मुख्यमंत्री से इंसाफ मिलने का भरोसा है। उधर, डीआईओएस राजेश कुमार का कहना है कि यदि कोई शिक्षक वेतन नहीं मिलने की शिकायत लेकर उनके पास आता है तो कार्रवाई होगी।