- हेपेटाइटिस से ग्रसित मरीजों को जांच से मिलेगा फायदा
- जिले में हेपेटाइटिस बी और सी से ग्रसित हैं ज्यादा मरीज
-15 मरीजों रोजाना अस्पताल में हो रही वायरल लोड की जांच
-30 मरीजों की रोजाना हेपेटाइटिस बी और सी की जांच हो रही
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। मेडिकल अस्पताल में वायरल लोड की जांच शुरू कर दी है। जांंच शुरू होने से हेपेटाइटिस से ग्रसित मरीजों को काफी फायदा मिलेगा। अब दो दिन में रिपोर्ट आने के बाद ही उनका इलाज शुरू होगा। अभी तक रिपोर्ट आने में एक महीने से ज्यादा तक का समय लगता था।
हेपेटाइटिस से ग्रसित मरीजों की वायरल लोड की जांच की जाती है। यह जांच इसलिए कराई जाती है, ताकि पता चल सके कि मरीज के शरीर में हेपेटाइटिस का कितना वायरस है। मेडिकल अस्पताल में रोजाना 15 मरीजों तक की वायरल लोड की जांच की जा रही है।
अभी तक वायरल लोड की जांच के लिए मरीजों का सैंपल मेरठ मेडिकल काॅलेज भेजा जाता था। जहां से रिपोर्ट में आने में एम महीने से ज्यादा तक का समय लगता है। अब बिजनौर मेडिकल अस्पताल में ही वायरल लोड जांच शुरू होने से मरीजों को काफी फायदा मिलेगा। दो दिन के भीतर मरीजों को रिपोर्ट दी जा रही है।
निजी लैब पर दो हजार रुपये में होती है वायरल लोड जांच
निजी लैब में वायरल लोड जांच दो हजार रुपये तक में की जाती है। इससे मरीजों की जेब पर भार पड़ता है। जबकि मेडिकल अस्पताल में वायरल लोड जांच निशुल्क की जा रही है। इससे मरीजों को ही फायदा मिल रहा है। वहीं यदि मरीज को मेरठ जाकर यह जांच करानी पड़े तो तीन से चार हजार रुपये तक खर्च हो जाते थे।
जून तक मिले हेपेटाइटिस के 3997 मरीज
जिले में इस वर्ष जून तक हेपेटाइटिस के 3997 मरीज मिले हैं। जिनमें हेपेटाइटिस बी के 887 और हेपेटाइटिस सी के 3110 मरीज शामिल है। इनका इलाज शुरू कर दिया गया है। वहीं मेडिकल अस्पताल में भी रोजाना 30 से ज्यादा मरीजों की हेपेटाइटिस की जांच की जा रही है।
जांच की दो मशीन उपलब्ध
माइक्रोबायोलॉजी की विभागाध्यक्षा डॉ. पूजा शर्मा ने बताया कि मेडिकल अस्पताल में इस समय वायरल लोड जांच की दो मशीन उपलब्ध हैं। जिससे एक बार में दो सैंपल ही लगते हैं। डेढ़ घंटे में एक सैंपल की रिपोर्ट आती है। फिलहाल भर्ती और इमरजेंसी मरीजों की वायरल लोड जांच की जा रही है। संसाधन बढ़ने पर जांच का दायरा भी बढ़ाया जाएगा।
महात्मा विदुर मेडिकल कॉलेज में हेपेटाइटिस बी और सी की वायरल लोड जांच शुरू कर दी है। इससे मरीजों को काफी फायदा मिलेगा। भविष्य में भी जांच का दायरा बढ़ेगा। - डॉ. उर्मिला कार्या, प्राचार्या, मेडिकल कॉलेज, बिजनौर