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ग्राम सभाएं करेंगी ग्रामीणों को जागरूक

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ग्राम सभाएं करेंगी ग्रामीणों को जागरूक
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धामपुर। गांव आमखेड़ा संजरपुर में फैली बर्ड फ्लू महामारी के चलते पशुपालन विभाग के अधिकारी शनिवार को तीसरे दिन में गांव में डेरा डाले हैं। उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए क्षेत्र को संक्रमित जोन घोषित कर दिया है। ग्रामीणों से अपील की है कि वे 21 दिन तक संबंधित संक्रमित जोन में एंट्री ना करें। विभाग के कर्मचारियों द्वारा पीपीई किट के साथ क्षेत्र को सैनिटाइज किया जा रहा है। इसके साथ ही 10 किमी परिधि में 27 से अधिक ग्राम सभाओं को ग्रामीणों को जागरूक करने की जिम्मेदारी दी गई है।
धामपुर थाने के गांव अमखेड़ा में 24 जनवरी को मदन सिंह पाल के मुर्गी फार्म में छह हजार से ज्यादा मरी मुर्गियों में से दो मुर्गियों का परीक्षण कराने के बाद बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई थी। महामारी फैलने की वजह से लोगों ने संक्रमित क्षेत्र की तरफ आवाजाही कम कर दी है। गांव के बाहर जिस स्थान पर मदन सिंह पाल का मुर्गी फार्म बना है, वह गांव जैतरा हथाई शेख को जाने वाले मार्ग पर स्थित है। मदन सिंह पाल के प्रभावित मुर्गी फार्म से 700 मीटर की दूरी पर गांव आमखेड़ा के ही रविंद्र चौहान का एक और मुर्गी फार्म है, जिसमें 7228 चूजों को पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने शुक्रवार को अपनी निगरानी में गड्ढे में दफन करा दिया है। शुक्रवार रात्रि करीब 8:30 बजे के बाद मुरादाबाद मंडल के अपर निदेशक विनोद कुमार यहां से वापस हुए हैं। अमरोहा, बिजनौर और रामपुर की टीम अब भी अलर्ट हैं। उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि संक्रमित जोन से करीब 10 किमी की परिधि के भीतर शामिल 27 से अधिक गांवों में मुर्गी और अंडे की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। डीएम रमाकांत पांडे ने गांव में मीट की दुकानों को बंद करने के भी निर्देश जारी कर दिए है। किसी भी हालत में 21 दिन तक दुकानों पर मुर्गा और अंडा नहीं बिकेगा।
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गन्ना छिलाई, पशु चारे का संकट
उधर संक्रमित जोन से प्रभावित गांव अमखेड़ा, जैतरा, पल्ला वाला, मटोरा बसेड़ा खुर्द, कागपुर, नीमला, लड्ढावाला, मधी, परमावाला आदि गांव के किसानों का कहना है कि गन्ने का सीजन चल रहा है। ऐसे में वह गन्ने की छिलाई कर आपूर्ति कैसे करेंगे। पशुओं के चारे का संकट भी गहराने लगा है। संक्रमित जोन में जब उनकी एंट्री नहीं होगी तो वे पशुओं के लिए बरसीम या गन्ने के ऊपरी भाग का अगोला चारे के लिए कैसे ले आएंगे।
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