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वट अमावस्या आज, पौधरोपण करने से मिलेगा पुण्य लाभ

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वट अमावस्या आज, पौधरोपण करने से मिलेगा पुण्य लाभ
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बिजनौर। वट अमावस्या के दिन पूजन के लिए लाई गई बरगद की टहनी को किसी भी गमले, डिब्बे, कप, गिलास आदि में मिट्टी भरकर लगाएं। इसके बाद फिर पूजन कर लें और उसकी परवरिश अपनी संतान की भांति ही करें। ऐसा करने पर यह अंकुर दे गया तो पौधा सुंदर बनेगा और वातावरण में शुद्धता आएगी। मान्यता है कि वट अमावस्या के दिन पौधे रोपित करने से अश्वमेघ यज्ञ के बराबर फल मिलता है। सनातन धर्म में इस व्रत को पौधों के संरक्षण के लिए ही किया जाता है।
हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या को वट सावित्री पूजा यानी वट अमावस्या के रूप में पूजा जाता है। इस दिन सुहागिन स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु के लिए बरगद की पूजा कर व्रत रखती हैं। बरगद की पूजन करने के बाद बायना निकालकर अपने बुजुर्गों को देती हैं और उनके चरण छूकर आशीर्वाद लेती हैं। आज बृहस्पतिवार को वट सावित्री व्रत है। मोहल्ला साहित्य विहार कॉलोनी निवासी विद्युत निगम के रिटायर्ड एसडीओ शशिमोहन शर्मा उर्फ स्वामी बिजनौरी ने सभी सुहागिन महिलाओं से अपील की है कि इस दिन अपने घरों में आने वाली बरगद की टहनियों की पूजा करने के बाद फेंकें नहीं, बल्कि उसकी कलम बनाकर उसे किसी भी शीशी, गिलास, बर्तन, गमले या फिर धरती आदि में ही रोपित कर दें। कुछ दिन में ही वह पौधे के रूप में विकसित हो जाएगा।
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डबराल ज्योतिष सदन के अध्यक्ष पंडित प्रभुदत्त डबराल ने बताया कि हिंदू शास्त्रों के अनुसार, वट वृक्ष के मूल में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु तथा अग्र भाग में शिव का वास माना गया है। देवी सावित्री भी इसी वृक्ष में निवास करती हैं। मान्यताओं के अनुसार, वट वृक्ष के नीचे सावित्री ने अपने पति को पुन: जीवित किया था। तब से ये व्रत ‘वट सावित्री’ के नाम से जाना जाता है। इस दिन विवाहित स्त्रियां अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए वट वृक्ष की पूजा करती हैं। वृक्ष की परिक्रमा करते समय इस पर 108 बार कच्चा सूत लपेटा जाता है। महिलाएं सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती हैं। सावित्री की यह कथा सुनने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और पति के संकट भी दूर होते हैं।
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‘इस व्रत का मकसद ही पौधों का संरक्षण है’
पंडित प्रभुदत्त डबराल का कहना है कि वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो बरगद का पौधा अनवरत ऑक्सीजन देता है। सनातन धर्म में इसी लिए सदियों से इस वृक्ष की पूजा की जाती है। बरगद का पौधा बहुवर्षीय पौधा होता है। महिलाएं इस वृक्ष की तरह ही अपने पति की लंबी आयु की कामना करती हैं। दरअसल, पीपल और बरगद की पूजा करने के पीछे सनातन धर्म में जो मकसद है वह पौधों का संरक्षण करना ही है। इसी लिए इन पौधों का काटना पाप समझा जाता है। इस दिन उपवास रखकर महिलाएं बरगद वृक्ष के संरक्षण की भी कामना करती हैं।
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