एडवांस पैसा लेकर भी करते हैं वारदात
अटैची चोरों को जिले के कुछ सराफ बाहर अपराध करने जाने के लिए पैसा देते हैं। चोरी के बाद गहने वे इन्हीं सराफ को सस्ते दामों में बेचते हैं। गहनों को सराफ तुरंत गला देते हैं। अटैची चोर दूसरे जिलों में ऑटो और बस के स्टाफ से मिलकर भी वारदात करते हैं।
ऐसे करते हैं वारदात
कोई भी कीमती सामान लोग अटैची में ले जाते हैं। शादी विवाह के सीजन में जा रहे परिवारों को यह भांप लेते हैं। ऑटो या बस में उसे अपने बीच में बैठा लेते हैं। गिरोह के कुछ सदस्य उन्हें बातों में उलझा लेते हैं तो कुछ अटैची को घेर लेते हैं। दूसरी सवारियों को लगता है कि ये सभी एक साथ है। कई चॉबी और लोहे के तार के टुकड़े से खोलकर गहने और नकदी निकालने के बाद उसे फिर से बंद कर देते हैं। हालांकि चोरी के साथ ये अब लूटपाट भी करने लगे हैं।
वाराणसी में की 15 से 20 वारदात
वाराणसी में बिजनौर के थाना हीमपुर दीपा के गांव सब्दलपुर निवासी सऊद अहमद, मोहम्मद जीशान और मोहम्मद दानिश को गिरफ्तार किया गया है। तीनों के पास से 70 हजार रुपये, दो चेन, एक मंगलसूत्र, तीन अंगूठी, तीन जोड़ी टॉप्स और अन्य जेवर बरामद हुए हैं। यहां हुई कुछ वारदात के बाद पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों की फुटेज से कुछ बदमाशों को चिह्नित किया, जिसके बाद शुक्रवार को इन्हें कैंट रेलवे स्टेशन से एक ऑटो से दबोच लिया। इन्होंने बताया कि वह 25 दिसंबर 2020 को बनारस आए थे। तब से लेकर अब तक उन्होंने 15 से 20 लोगों को शिकार बनाया है।
दस दिन तक रहते हैं एक शहर में
वाराणसी पुलिस को गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि वह ऑटो में सवारी के तौर पर बैठते हैं। जब कोई दूसरा पैसेंजर आता है तो उसे बीच में बैठा लेते हैं। फिर उसका सामान चुरा लेते हैं या जबरदस्ती छीन लेते हैं। तीनों ने बताया कि वह इसके पहले प्रयागराज, चंदौली, पटना और दिल्ली सहित कई अन्य शहरों में इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं। बनारस में वह चौथी बार आए थे। तीनों जिस शहर में जाते हैं वहां लगभग 10 दिन रहते हैं और फिर चोरी-लूटपाट कर वापस लौट जाते हैं।
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