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खूबसूरती नायाब, फिर भी पर्यटन के मानचित्र से गायब

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कालागढ़ में सड़क के किनारे खड़ा वन्यजीव। - फोटो : DHAMPUR
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खूबसूरती नायाब, फिर भी पर्यटन के मानचित्र से गायब
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कालागढ़। शिवालिक पर्वतमालाओं की तलहटी में बहती रामगंगा नदी की घाटी में बसे खूबसूरत कालागढ़ को देश विदेश के पर्यटन मानचित्र में जगह नहीं मिल सकी है। जबकि यहां पर्यटन का काफी संभावनाएं हैं और पर्यटक भी यहां आते रहते हैं।
कालागढ़ में वन्यजीवों से समृद्ध वनों की कोई कमी नहीं है। दिन में ही बाघ जैसे जीव सड़कों के किनारे नजर आ जाते हैं। क्षेत्र की नैसर्गिक खूबसूरती केवल यहीं तक महदूद होकर रह गई है। देश की बहुउद्देश्य रामगंगा परियोजना के निर्माण के साथ ही कालागढ़ का नाम दुनिया में जाना जाता है। परियोजना के निर्माण के साथ ही कालागढ़ की जमीन पर बाहरी लोगों के कदम पड़े। हालांकि 1936 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन गवर्नर सर माल्कम हेली के नाम पर यहां के वनों को हेली नेशनल पार्क का नाम दिया गया था। भारत की आजादी के बाद इसका नाम रामगंगा नेशनल पार्क रखा गया। बाद में शिकारी जिम कार्बेट की मृत्यु कीनिया में हो जाने के बाद उसके वन्यजीव संरक्षण कार्य को देखते हुए इसका नाम कार्बेट नेशनल पार्क रखा गया। इसका मुख्यालय रामनगर बना दिया गया। मुख्यालय के रामनगर में बन जाने के बाद ही कालागढ़ का महत्व कम होता चला गया। कालागढ़ से झिरना पर्यटन जोन के लिए पर्यटकों को जाने की अनुमति थी। जिसे उत्तराखंड राज्य निर्माण के बाद बंद कर दिया गया।
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मंजूरी के इंतजार में रामगंगा नदी के पर्यटन का प्रस्ताव
कार्बेट टाइगर रिजर्व के कालागढ़ स्थित कार्यालय से रामगंगा नदी में नौका विहार करने का एक प्रस्ताव जून 2019 में शासन को भेजा गया था। तीन वर्ष होने को आए अभी तक शासन की ओर से इस प्रस्ताव को हरी झंडी नहीं मिल सकी है। कालागढ़ के उप प्रभागीय वनाधिकारी आरके तिवारी ने बताया कि उच्च स्तर से कोई आदेश होने पर ही यहां पर्यटन हो सकता है।
दिन में ही नजर आते हैं वन्यजीव
देश विदेश के पर्यटक जहां वन्यजीवों के दीदार को रामनगर होकर कार्बेट नेशनल पार्क में पहुंचते हैं और कई कई दिन वन्यजीवों के दीदार की आस लिए वनों में सफारी करते हैं वहीं कालागढ़ में दिन में ही रायल बंगाल टाइगर, एशियाई हाथी आदि वन्यजीवों के दर्शन हो जाना आम बात है।
पर्यटकों के ठहरने के लिए पर्याप्त डाक बंगले
कालागढ़ में पर्यटकों के विश्राम के लिए वन विभाग का डाक बंगला, सिंचाई विभाग का रामगंगा भवन, विद्युत विभाग का डाक बंगला मौजूद है। सभी बंगले राजकीय कार्य में प्रयोग किए जाते हैं। इसके अलावा अनेक छात्रावास आदि खाली पड़े हैं। यदि यहां से पर्यटन शुरू किया जाए तो इनका भी सदुपयोग हो और शासन को पर्यटन के नाम पर राजस्व मिल सके।
पर्यटकों के लिए बना प्लेटिनम जुबली गेट पड़ा सूना
कार्बेट टाइगर रिजर्व, नेशनल पार्क प्रशासन ने देश विदेश के पर्यटकों को कालागढ़ से वनों में प्रवेश देने के लिए बना प्लेटिनम जुबली गेट भी सूना पड़ा हुआ है। पर्यटन की मंजूरी न मिल पाने से यह गेट केवल वन चौकी का ही काम कर रहा है। कालागढ़ रामनगर मोटरमार्ग पर बने इस स्वागत द्वार पर जाकर लोगों को निराशा ही हाथ लगती है। यहां से अंदर वनों में जाने की अनुमति ही नहीं है।
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कार्बेट में कालागढ़ से पर्यटन खोले जाने को मांग
कालागढ़ में भारतीय जनता पार्टी के मंडल अध्यक्ष योगेश कुमार सैनी, व्यापार मंडल के वरिष्ठ नेता शंकर सिंघल का कहना है कि कालागढ़ से पर्यटन खोले जाने की मांग को लेकर क्षेत्रीय विधायक एवं विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी भूषण को ज्ञापन दिया गया। इससे पूर्व से यह मांग चल रही है।

कालागढ़ के वनों में पानी पीता रायल बंगाल बाघ।- फोटो : DHAMPUR

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