एनआईए के डीएसपी व उनकी पत्नी की हत्या में दो को फांसी की सजा
बिजनौर। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. विजय कुमार ने एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना की हत्या को विरल से विरलतम की श्रेणी में माना है और दोषी गैंगस्टर मुनीर और रैय्यान को फांसी की सजा सुनाई है।
शासकीय अधिवक्ता आनंद जंघाला ने बताया कि एनआईए के डिप्टी एसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना की मुनीर और रैय्यान ने दो अप्रैल की रात सहसपुर में गोलियां बरसाकर हत्या कर दी थी। कार में इनके साथ बेटी जिमनिश(16), बेटे शाहबाज (12) भी थे। इनके पीछे दूसरी कार में आ रहे तंजील अहमद का भाई रागिब घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इससे पहले शुक्रवार को कोर्ट इस मामले में मुनीर और रैय्यान को दोषी करार दिया था। घटना की साजिश में शामिल होने के आरोपी तंजीन, जैनी और रिजवान को बरी कर दिया था।
घटना क्रूरता की पराकाष्ठा, न्याय के शासन व धर्म को चुनौती: कोर्ट
कोर्ट ने शनिवार को दिए निर्णय में कहा है कि मुनीर और रैय्यान ने बिना किसी उकसावे के पूर्व नियोजित योजना के तहत एक बड़े पुलिस अधिकारी और उनकी पत्नी पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं। शरीर में पाई गई गोलियों की 33 चोटें अभियुक्तों की क्रूरता की पराकाष्ठा की द्योतक है। कार में सवार दोनों बच्चे भय का शिकार हुए और पूरे समाज में डर का माहौल बना। इस प्रकार की नृशंस हत्याओं से समाज में अस्थिरता पैदा होगी। यह हत्याकांड न्याय के शासन और धर्म को खुली चुनौती है। इसलिए दोहरे हत्याकांड में मुनीर और रैय्यान को मृत्युदंड से दंडित किया जाना न्यायोचित है।
बोली बेटी, हमें अनाथ करने वाले को मौत की सजा देकर किया न्याय
स्योहारा। फैसला आने के बाद तंजील अहमद की बेटी जिमनिस भावुक हो गई और बोली कि मेरे पापा और मम्मी को जिस जालिम ने मार कर हमें अनाथ किया अदालत ने उसे मौत की सजा देकर न्याय किया है। इस सजा को पूरी होते देखकर ही संतुष्टि होगी। हमारे संविधान में मौत से बड़ी कोई सजा नहीं है। अब मैं और क्या कहूं? संवाद
एनआईए के डिप्टी एसपी तंजील अहमद की पुत्री जिमनिश।- फोटो : BIJNOR
बिजनौर जजी में दोहरे हत्याकांड में फांसी की सजा होने के बाद कोर्ट में जाने से पहले वज्र वाहन में ह?- फोटो : BIJNOR