सहालग में भी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं व्यापारी
बिजनौर। कोरोना संक्रमण से राहत मिली है, लेकिन सहालग से जुड़े व्यापारी अब भी हाथ पर हाथ रखकर बैठे हैं। सहालग चल रहे हैं, लेकिन बैंक्वेट हॉल खाली पड़े हैं। जनता भी पिकनिक मनाने या बाहर खाना खाने नहीं जा रही है। सरकार की ओर से जब तक छूट बढ़ाई जाएंगी, तब तक सहालग खत्म हो जाएंगे।
शादियां दो परिवारों में खुशियों का वातावरण ही नहीं बनातीं, बल्कि बाजार में कई तरह के कामों से जुड़े व्यापारियों की आमदनी का जरिया भी होती हैं। बैंड बाजे वालों से लेकर, वाहनों के शोरूम, सराफा बाजार और हलवाइयों के पास भी शादियों का काम ही मुख्य रूप से आता है। सहालग में इन व्यापार से जुड़े लोगों को बहुत काम मिलता है, लेकिन पिछले तीन सहालग कोरोना की भेंट चढ़ चुके हैं। शादियां हुईं। लेकिन, अधिक मेहमानों के जाने की अनुमति नहीं थी। जन्मदिन आदि की पार्टी तो घरों में ही हुईं। कोरोना की वजह से लगी बंदिशों से सहालग से जुड़ा कारोबार बुरी तरह से अब तक प्रभावित है। सरकार की ओर से अगर अब रियायत बढ़ाई भी जाती हैं, तब भी इस काम से जुड़े व्यापारियों को अक्तूबर, नवंबर तक जाकर राहत मिलेगी।
केवल होम डिलीवरी से नुकसान
होटल एवं रेस्टोरेंट एसोसिएशन के सचिव पंकज चौधरी के अनुसार काम एकदम ठप है। अभी केवल होम डिलीवरी की अनुमति है। सरकार को जल्द से बैठकर खाना खिलाने की अनुमति देनी चाहिए। केवल होम डिलीवरी से काम नहीं चलता है। बाजार में भीड़ है और होटल सूने पड़े हैं।
नहीं हुई कोई एडवांस बुकिंग
बैंक्वेट हॉल के मालिक विनीत अग्रवाल उर्फ लालू के अनुसार अभी तक कोई बुकिंग नहीं हुई है। जब तक मेहमानों को ज्यादा संख्या में बुलाने की अनुमति नहीं मिलेगी, तब तक बैंक्वेट हॉल में काम नहीं मिलेगा। सरकार को व्यापारियों को जीएसटी, बिजली बिल और नगर पालिका व जिला पंचायत के टैक्स में छूट देनी चाहिए।
पशुओं के आगे डाले लाखों के फूल
फूलों की खेती करने वाले अखिलेश चौधरी का कहना है कि शादी ही नहीं हो रही तो फूल कहां बिकेंगे। लाखों रुपये के फूल कूड़ी और पशुओं के आगे डालने पड़े। पॉली हाउस में फसल तैयार खड़ी है, लेकिन डिमांड नहीं है। फूलों की खेती करने वाले किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार को कोई घोषणा करनी चाहिए।