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प्राइवेट मंडी खोलने की तैयारी में लगे व्यापारी

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बिजनौर। जिला मुख्यालय पर अनाज और सब्जी-फल मंडी की मांग जल्दी ही पूरी होने वाली है। मंडी सरकार की तरफ से नहीं बल्कि व्यापारियों की तरफ से बनाई जाएगी। मंडी के लिए जमीन की तलाश भी शुरू हो गई है। मंडी खुलने से किसानों की आढ़त की जगह की समस्या का समाधान हो जाएगा। मंडी समिति परिसर में फसलों की आढ़त लगती है।
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पिछले चार दशक से जिला मुख्यालय पर मंडी समिति के लिए जमीन की खोज चल रही है। शुरुआत में नियम था कि किसान से सर्किल रेट पर जमीन खरीदी जाए। तब किसान भी जमीन देने को तैयार थे लेकिन विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के चलते जमीन नहीं खरीदी जा सकी। बाद में नियम आ गया कि सर्किल रेट से चार गुना रेट पर जमीन खरीदी जाएगी। लेकिन शासन किसानों से वार्ता कर मोलभाव कर कम कीमत पर जमीन खरीदना चाहता था। किसान इसके लिए तैयार नहीं हुए। कुछ किसानों ने जमीन का प्रस्ताव भी दिया लेकिन बात नहीं बनी। फिलहाल सब्जी व फल मंडी में ही अनाज की आढ़त लगती है। कम जगह के चलते किसानों को फसल बेचने के लिए जूझना पड़ता है।
अब सरकार ने नियम बना दिया है कि सरकारी मंडी से बाहर खरीद फरोख्त करने पर व्यापारियों को मंडी शुल्क नहीं देना होगा। इससे व्यापारियों ने अपनी ही मंडी खोलने का निर्णय लिया है। व्यापारी इसके लिए जमीन की तलाश भी कर रहे हैं। ईदगाह रोड पर जमीन की तलाश तेजी से चल रही है। कुछ किसान जमीन बेचने के लिए तैयार भी हो गए हैं। वार्ता अंतिम चरण में है। सब्जी एवं फल मंडी यूनियन अध्यक्ष शमशाद अंसारी का कहना है कि निजी मंडी के लिए व्यापारी जमीन तलाश कर रहे हैं। वर्तमान मंडी स्थल में जगह नहीं बची है। मंडी समिति खुली जगह में बनने से किसानों को फायदा होगा।
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