वर्ष 2014 में मोदी लहर आई तो बिजनौर सीट पर कुंवर भारतेंद्र सिंह सांसद चुने गए, जबकि नगीना से डॉ. यशवंत सिंह लोकसभा में पहुंचे। इसके बाद साल 2019 में भाजपा को इन दोनों ही सीटों से हाथ धोना पड़ा। साल 2019 में बसपा के मलूक नागर बिजनौर से लोकसभा में पहुंचे और नगीना सीट भी बसपा के खाते में ही रही।
अब रालोद और भाजपा के गठबंधन के बाद बिजनौर सीट के समीकरण ही बदल रहे हैं। बिजनौर सीट के रालोद के खाते में जाने की पूरी उम्मीद है। उधर गठबंधन से पहले तक भाजपा से टिकट पाने वालों की लंबी कतार थी।
अब गठबंधन तय माना जा रहा तो भाजपा के कुछ नेता पीछे हट गए हैं जबकि प्रदेश उपाध्यक्ष मोहित बेनीवाल अभी भी प्रयास में लगे हैं। एक दिन पहले ही उन्होंने क्षेत्र में सभा की थी। भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष मोहित बेनीवाल का कहना है कि जब तक घोषणा नहीं हो जाती, तब तक कुछ कहा नहीं जा सकता। पार्टी का जो भी निर्णय होगा स्वीकार होगा।
उधर, रालोद के नेता प्रयास में तो जुटे हैं, लेकिन खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि घोषणा होने के बाद स्थिति साफ होगी।