वन निदेशक राहुल ने बताया कि इस घटना के बाद से वनकर्मी दहशत में हैं। सुरक्षा कारणों से वनों में गश्ती दलों को समूह के रूप में जाने और कैमरा ट्रैप लगाने को कहा गया है। कैमरा ट्रैप से पता चलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, वन कर्मी के शव का पोस्टमार्टम होने के बाद पीड़ित परिवार को सहायता दिलाई जाएगी।
अब तक हो चुकी दस वनकर्मियों की मौत
कार्बेट टाइगर रिजर्व के वनों में अब तक 10 वनकर्मी वन्यजीवों के हमले में मौत की नींद सो चुके हैं। 22 जुलाई 2012 को सर्पदूली, 20 अक्तूबर 2013 को कालागढ़, 25 मार्च 2014 को सर्पदूली, 22 मार्च 2016 को कालागढ़, आठ अप्रैल 2016 को सर्पदूली, 10 जून 2016 को सर्पदूली व बिजरानी, 15 जुलाई 2019 को प्लेन रेंज, 13 अप्रैल 2019 को ढिकाला में और अब 20 अक्तूबर को प्लेन रेंज में वनकर्मी राजेश नेगी की बाघ ने जान ले ली है।
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