बिजनौर जिला कारागार में आजीवन कारावास व गैर इरादतन हत्या की सजा काट रहीं दो महिला कैदियों समेत तीन महिला कैदियों की स्वतंत्रता दिवस पर रिहाई हो सकती हैं। इनकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। शासन से हरी झंडी मिलने के बाद ये महिला कैदी रिहा हो पाएंगी।
शासन ने लंबे समय से जेल में सजा काट रहीं महिला बंदियों को स्वतंत्रता दिवस पर रिहा करने का निर्णय लिया है। ऐसी महिलाओं की रिपोर्ट प्रशासन से मांगी है। अफजलगढ़ थाने के गांव चौहड़वाला हिदायतपुर निवासी परमानंद की पत्नी दयावती उर्फ गुड्डी हत्या के मामले में साल 2008 से जिला कारागार में आजीवन कारावास की सजा काट रही है।
इसके अलावा मुरादाबाद के मंझोला थाना क्षेत्र की रहने वाले नईम अहमद की पत्नी यासमीन भी साल 2013 से गैर इरादतन हत्या के मामले में लखनऊ नारी निकेतन में बंद है। यासमीन के पति नईम अहमद परिवार के साथ मुरादाबाद का मकान छोड़कर नजीबाबाद में आ बसे हैं। इसके अलावा एक अन्य महिला बंदी भी जेल में सजा काट रही है।
इन तीनों को स्वतंत्रता दिवस पर रिहा करने के लिए जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय कुमार ने रिपोर्ट तैयार करके डीएम के माध्यम से शासन को भेज दी है। रिपोर्ट में पीड़ित पक्ष की भी रजामंदी ली गई है। जेल व नारी निकेतन में सजा के दौरान इन महिला बंदियों का व्यवहार कैसा रहा, इस सबके बारे में रिपोर्ट तैयार करके भेजी गई है।
जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय कुमार ने तीन महिला कैदियों के बारे में रिपोर्ट भेजने की पुष्टि की है। जेल अधीक्षक लाल रत्नाकर सिंह के अनुसार उन्हें दयावती व यासमीन की रिपोर्ट शासन को भेजने की जानकारी है। उन्होंने बताया कि यासमीन ने हालांकि अपराध मुरादाबाद जिले में किया है पर उसका पति पूरे परिवार के साथ नजीबाबाद रहते हैं। इसलिए उसकी रिपोर्ट भी यहीं से गई है।