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Bijnor News: गूंज रहीं या अली मौला अली की सदाएं, कर्बला के जिक्र से नम हुईं आंखें

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जोगीरम्पुरी दरगाह पर बृहस्पतिवार से चार रोजा मातमी मजलिसों का हुआ आगाज
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उलमा ने नेकी और इंसानियत की राह पर चलने का दिया पैगाम

संवाद न्यूज एजेंसी
नजीबाबाद (बिजनौर)। मौला अली की बारगाह में नजराना-ए-अकीदत पेश करने के साथ गमगीन माहौल में मातमी मजलिसों का सिलसिला शुरू हो गया। शिया उलमा ने वाकयाते कर्बला के जिक्र के साथ जायरीनों को नेकी और इंसानियत के रास्त पर चलने, बुराइयों से दूर रहने का पैगाम दिया।
नजफ-ए-हिंद जोगीरम्पुरी दरगाह परिसर में या अली मौला अली, मुश्किल कुशा मौला अली की सदाएं गूंजनी शुरू हो गई। शमशुल हसन हॉल में बृहस्पतिवार तड़के मौलाना आबिद ने मातमी मजलिस का आगाज किया। दिनभर मातमी मजलिसों का सिलसिला जारी रहा। उलमा ने हजरत मोहम्मद साहब, पैगंबर-ए-इस्लाम और मौला-ए-कायनात अली इब्नेतालिब के किरदार पर रोशनी डाली। उलमा ने इस्लाम की हिदायतों पर अमल करने और मौला अली की जिंदगी से सबक लेने की सलाह दी।
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मजलिस को मौलाना मो. असगर, मौलाना तनजीम रजा सेंथली, मौलाना रजा हुसैन लखनवी, मौलाना हुसैन जाफर वहब, मौलाना मोहसिन तकवी देहलवी ने खिताब किया। वाकयाते कर्बला के जिक्र सुनकर जायरीन फफककर रोने और सीनाजनी के लिए मजबूर हुए। नसीमुल बाकरी ने मजलिसों का संचालन किया।
दरगाह कमेटी के अध्यक्ष इरम अली जैदी, सचिव कसीम अब्बास, डॉ.आफताब नकवी की देखरेख में शुरू हुई मजलिसों में पहुंचे जायरीनों ने मौला अली की बारगाह और सैय्यद राजू के मजार पर नजराना-ए-अकीदत पेश किया।
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नम आंखों से निहारे मातमी मंजर
अंजुमन यादगारे हुसैनी की ओर से ख्यामे हुसैनी और अंजुमन-ए-हैदरी की ओर से मश्क-ए-सकीना और कैद खानाए-जिंदाने शाम सजाए गए हैं। वाकयाते कर्बला, दीन और इस्लाम की हिफाजत के लिए हजरत-ए-इमाम और उनके साथियों की बेशकीमती शहादतों से जुड़े मंजर सोगवारों ने नम आंखों से निहारे।
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