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इस्लामनगर पंचायत के गांव विकास को तरसे, अधिकारी नहीं ले रहे सुध

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कालागढ़ में नई बस्ती में बदहाल पड़ा रास्ता। - फोटो : DHAMPUR
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इस्लामनगर पंचायत के गांव विकास को तरसे
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कालागढ़। विकास क्षेत्र अफजलगढ़ की इस्लामनगर पंचायत के गांव विकास को तरस रहे हैं। गांवों में रास्तों व पेयजल की समस्या से ग्रामीण जूझ रहे हैं। पेयजल के लिए ग्रामीण सरकारी हैंडपंप पर ही निर्भर हैं।
विकास क्षेत्र अफजलगढ़ के अंतर्गत इस्लामनगर पंचायत में पुराना कालागढ़, हेड़िया बस्ती, नई बस्ती, भिक्कावाला, जामनवाला, मुरलीवाला व बनियोवाला गांव आते हैं। इन गांवों में ग्रामीणों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं का ग्रामीण इंतजार ही कर रहे हैं। सबसे बुरी हालत नई बस्ती की है। इस इलाके में न तो रास्ते ही बन पाएं हैं और न ही यहां ग्रामीणों के लिए पेयजल की कोई सुविधा ही है। यह इलाका पुराने कालागढ़ बाजार से सटा होने के साथ साथ कालागढ़ के जंगलों का सीमावर्ती गांव है। यहां सबसे अधिक कहर सूखा स्रोत बरपाता है। तेज बारिश होने पर गांव को स्रोत का पानी एक टापू में बदल देता है। इस गांव का मुख्य मार्ग पानी में समाने लगता है। घरों के सामने स्रोत का पानी आ जाता है।
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केन्द्रीय कालोनी से होकर बाघ, गुलदार व हाथी जैसे जीव सूखा स्रोत से होकर गांव की सीमा तक पहुंच जाते हैं। ग्रामीणों की सुरक्षा को खतरा बना रहता है। ग्रामीण अनिल राजौरा, कांग्रेस नेत्री संतोष सैनी आदि का कहना है कि पुराना कालागढ़, हेड़िया बस्ती, पुराना कालागढ़ में पेयजल की सुविधा मिलनी चाहिए। वहीं रास्तों को भी बनाना चाहिए। गांव में स्ट्रीट लाइट लगनी चाहिए। जामनवाला गांव में रास्तों की समस्या है। इसके अलावा बनियावाला भी विकास को तरस रहा है। लेकिन प्रशासन ग्रामीणों के शोर मचाने के बाद भी सुध नहीं ले रहा है।
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कार्ययोजना में शामिल
ग्राम प्रधान चौधरी गीतेंद्र सिंह ने बताया कि नई बस्ती में रास्ते का मामला कार्य योजना में शामिल किया गया है। जहां तक पेयजल का मामला है उसे जल समिति के माध्यम से जल निगम को भेजा जाएगा। एसडीएम धीरेंद्र सिंह का कहना है कि ऐसा कोई मामला संज्ञान में नहीं है। वे जांच कर समस्या का निदान कराने का प्रयास करेंगे।
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