फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रदूषण से घुट रहा गंगा की सहायक नदियों का दम

विज्ञापन
विज्ञापन
प्रदूषण से घुट रहा गंगा की सहायक नदियों का दम
विज्ञापन

बिजनौर। जिले से होकर बहने वाली गंगा की सहायक नदियों का दम प्रदूषित पानी से घुट रहा है। खासकर छोइया नदी में इसे साफ देखा जा सकता है। हालांकि बान नदी को बचाने के लिए अभियान चलाया गया था। लोगोें का कहना है कि दूसरी नदियों की हालत में भी सुधार किया जाना चाहिए।
जनपद से गंगा, रामगंगा, खो नदी, छोईया, बान, मालन समेत दर्जनभर नदियां गुजरती है। नदियां जनपद में सिंचाई का मुख्य स्रोत है लेकिन अतिक्रमण तथा अवैध कब्जों के कारण कई नदियों के अस्तित्व पर संकट है। राज्य सरकार में मंत्री रहे स्व. चेतन चौहान के प्रयासों से अमरोहा जनपद से होकर बहने वाली बान नदी के जीर्णोद्धार किया गया। जनपद बिजनौर में 8 जून 2019 को तत्कालीन डीएम सुजीत कुमार ने ग्राम जीवनपुर में बान नदी के जीर्णोद्धार कार्यक्रम का शुभारंभ किया था। उस समय बान नदी एक संकरे नाले जैसी दिखाई देती थी लेकिन काम शुरू होने के बाद बान नदी को नौ मीटर चौड़ा किया गया तथा नदी की जमीन से अवैध कब्जे भी हटवाए गए। नदी के दोनों और पटरी पर पौधरोपण भी किया गया। अब यह नदी जैसी दिखाई देती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

नगीना- बिजनौर मार्ग पर बहने वाली छोईया नदी में कई फैक्टररियों का पानी डाला जाता है। ग्रामीणों के तमाम विरोध के बावजूद भी छोईया नदी स्वच्छ नहीं हो पाई है। जिला पंचायत अध्यक्ष साकेन्द्र प्रताप सिंह का कहना है कि उन्होंने छोईया नदी के प्रदूषण के संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया है।

कालागढ़ में बांध का खूबसूरत जलाशय।- फोटो : BIJNOR

कालागढ़ में सैडिल बांध पर नदी में नहाता एक हाथी।- फोटो : BIJNOR

कालागढ़ में मुख्य बांध पर लंका क्षेत्र में भ्रमण करता एक हाथी।- फोटो : BIJNOR

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें