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Bijnor News: शेरकोट के ब्रश से मिटा देंगे बेरोजगारी का दाग

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बिजनौर। शेरकोट में ब्रश बनाने की परंपरा अब जिले में अन्य कस्बों तक भी विस्तार करेगी। उद्योग विभाग इस पारंपरिक हस्तशिल्प के फैलाव के लिए युवाओं को 10 दिवसीय प्रशिक्षण देगा। इसके लिए युवाओं से ऑनलाइन आवेदन मांगे गए हैं। इसका उद्देश्य न केवल शिल्प कौशल को संरक्षित करना है, बल्कि नई जगहों पर रोजगार के अवसर भी बढ़ाना है। इससे ब्रश उत्पादन का दायरा बढ़ेगा। साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। इसके अलावा युवाओं को रोजगार के साथ-साथ आत्मनिर्भर बनने का मौका मिलेगा।
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शेरकोट को ब्रश निर्माण के लिए लंबे समय से जाना जाता है। एक अनुमान के मुताबिक शेरकोट में करीब 10 हजार कारीगर हाथों के हुनर से ब्रश तैयार कर रहे हैं। शेरकोट ब्रश उद्योग का सालाना टर्नओवर करीब 100 करोड़ रुपये हैं। कारीगर पारंपरिक और आधुनिक तकनीकों से उच्च गुणवत्ता वाले ब्रश तैयार करते हैं। अब उद्योग विभाग की पहल से यह कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से अन्य कस्बों के युवाओं तक पहुंचाया जाएगा।
सहायक आयुक्त उद्योग बलराज सिंह ने बताया कि पारंपरिक कौशल को आधुनिक उद्योग के साथ जोड़ने का एक प्रयास है। प्रशिक्षित कारीगर नई तकनीक और डिजाइन के साथ ब्रश तैयार करेंगे। इससे उत्पाद की गुणवत्ता और बाजार में प्रतिस्पर्धा दोनों बढ़ेंगे। बेरोजगारी भी दूर होगी।
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