नजीबाबाद-पत्थरगढ़ किले के तालाब में स्थित कुआं एवं क्षतिग्रस्त सीढि़यां।(संवाद)
नजीबाबाद। नवाब नजीबुद्दौला की ऐतिहासिक इमारत पत्थरगढ़ के किले को बचाने, इसके खोए हुए स्वरूप को मूल रूप में लाने की पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की योजना है। किला परिसर में महल के अवशेष तलाशे जाएंगे। साथ ही बावड़ी के स्वरूप को मूल रूप में लाने और प्राकृतिक पानी के स्रोत को बचाने की कवायद की जाएगी।
नवाब नजीबुद्दौला ने करीब 1752 ईसवी में पत्थरगढ़ का किला बनवाया था। करीब 40 एकड़ भूमि में बने किले की कलात्मक कारीगरी में मोरध्वज और आस-पास के क्षेत्र से पत्थर लाकर किला बनाया गया। सुल्ताना डाकू के किले में लंबे अरसे तक पनाह लेने की वजह से नवाब नजीबुद्दौला की इस इमारत को सुल्ताना डाकू के नाम से पहचान मिली।
वर्तमान में पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीन किले को संरक्षित रखना, कलात्मक कारीगरी को इतिहास बनने से बचाने के लिए पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग पिछले करीब एक दशक से प्रयासरत है। मुख्यद्वार, दीवारों की मरम्मत की गई, लेकिन कई स्थानों से किले की दीवार अभी भी जीर्ण अवस्था में है।
नजीबाबाद दिशा के मुख्य द्वार सहित आवागमन के रास्तों को विभाग ने बंद कराकर मुख्य द्वार पर कर्मचारी तैनात कर दिए हैं। अनुमति के साथ किले का भ्रमण संभव है। संवाद
n बावड़ी को मिलेगा मूल स्वरूप : पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने पत्थरगढ़ के किले की बावड़ी को मूल रूप देने की कवायद शुरू की है। बताया जाता है कि पानी का प्राकृतिक स्रोत सुरक्षित है। खोदाई में भूमि तल से करीब 20 से 25 फिट की गहराई पर कुआं और आस-पास मेहराबनुमा आकृतियां मिलीं हैं। पुरातत्व विभाग चारों ओर की खस्ताहाल सीढि़यों को मूल स्वरूप में लाने का कार्य जल्द शुरू करेगा।
नजीबाबाद-पत्थरगढ़ किले के तालाब में स्थित कुआं एवं क्षतिग्रस्त सीढि़यां।(संवाद)