बारिश और कोहरे ने चीनी मिलों का बिगाड़ा गणित
बिजनौर। बारिश और कोहरे ने चीनी मिलों को फिर से मुसीबत में डाल दिया है। बारिश व कोहरे से चीनी की रिकवरी फिर से घट गई है। रिकवरी घटने से चीनी मिलों को प्रति क्विंटल गन्ने की पेराई पर आठ रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। अगर मौसम जल्दी न खुला तो चीनी मिलों का नुकसान बढ़ता रहेगा।
इस बार चीनी मिलों के लिए कोहरा और बार बार हो रही बारिश मुसीबत बन गई है। बारिश और कोहरे से चीनी की रिकवरी बहुत प्रभावित हो रही है। अनुमान लगाया जा रहा था कि जनवरी तक जिले की चीनी मिल 14 प्रतिऱ्शत तक रिकवरी प्राप्त कर लेंगी, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो पाया है। हर दो सप्ताह बाद दो से तीन दिन तक होने वाली बारिश व कोहरे ने चीनी मिलों की रिकवरी पर ब्रेक लगाए दिए हैं। चीनी मिलों की रिकवरी मौसम की वजह से पूरी नहीं मिल पा रही है। प्रति क्विंटल गन्ने पर रिकवरी फिर से .25 प्रतिशत कम हो गई है। बारिश से पहले चीनी मिलों में एक क्विंटल में औसत 11.50 किलो चीनी तक बन रही थी। अब यह मात्रा घट गई है। एक क्विंटल गन्ने में जो अब तक 11.50 किलो चीनी निकल रही थी वह अब घट कर 11.25 क्विंटल तक रह गई है। प्रति क्विंटल पर चीनी मिलों को आठ रुपये तक का नुकसान हो रहा है।
चीनी मिल रिकवरी
धामपुर 10.25
स्योहारा 11.55
बिलाई 11.35
बहादरपुर 11.85
बरकातपुर 11
बुंदकी 10.25
चांदपुर 11.20
बिजनौर 11.30
नजीबाबाद 11.75
नोट ये आंकड़े चीनी मिलों से लिए गए हैं।
धूप कम निकलने से मिलों को नुकसान
गन्ने के पौधे की पत्तियां धूप की मौजूदगी में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया करके भोजन बनाती हैं। गन्ने के पौधे में बनने वाले सुक्रोज से चीनी बनती है व ग्लूकोज को गन्ना भोजन के रूप में खाता है। धूप निकलने से ग्लूकोज नहीं बनता है तो पौधा सुक्रोज को ग्लूकोज में बदलकर खाने लगता है। बारिश व कोहरे से धूप कम निकलने से मिलों को नुकसान हुआ है।
उम्मीद के मुताबिक रिकवरी नहीं
बिजनौर चीनी मिल गन्ना महाप्रबंधक राहुल चौधरी के अनुसार मिल की रिकवरी घट रही है। जनवरी में मिलों की रिकवरी उम्मीदों के मुताबिक नहीं मिल रही है।