आधे ही रह गए आलू के बीज के दाम
बिजनौर। जिले में इस बार आलू की फसल का रकबा घट सकता है। आलू की बाजार में कीमत कम होने की वजह से किसानों के कम बीज लेने की बात कही जा रही है। किसानों का कहना है कि दो या तीन साल बाद ऐसा मौका आता है, जब आलू के दाम कम रहते हैं। किसानों का मानना है कि बीज सस्ता होने के कारण इस बार आलू की फसल बहुत ही मंदी रहेगी।
कोरोना की पहली लहर के बाद आलू के दाम आसमान पर पहुंच गए थे। तब एक किलो आलू 25 से 30 रुपये प्रति किलो तक बिक गया था। जिले में पांच हजार हेक्टेयर जमीन में आलू की खेती होती है। आलू महंगा होने पर किसानों ने इसका रकबा तो नहीं बढ़ाया था, लेकिन उन्नत प्रजाति के बीज लेकर इसकी खेती की थी। दो साल से आलू मुनाफे का सौदा बना हुआ है। आलू के दाम बढ़ने से बीज के दाम भी बढ़े थे। इस समय भी आलू आढ़त पर दस रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। यह रेट भी कम नहीं हैं, लेकिन पिछले सालों से दाम आधे हैं।
दूसरे जिलों में आलू काफी तादाद में बोया जा रहा है। इसे देखते हुए इस बार आलू के दाम कम रहने के कयास लगाए जा रहे हैं। माना जाता है कि आलू के दाम हर दो-तीन साल बाद नीचे जाते हैं। इस वजह से इस बार किसान कम रकबे में आलू लगाने की बात कह रहे हैं। जिससे रकबा घटने की संभावना है।
जिले में दो प्रजातियों के बीज उपलब्ध
जिले के किसान कुफरी ख्याति और कुफरी बहार 3797 बीज बोते हैं। उद्यान विभाग की ओर से इसका 50-50 क्विंटल बीज मंगाया गया है। गुणवत्ता के आधार पर आलू के बीज का दाम 1475 से 2080 रुपये प्रति क्विंटल तक हैं। बीज की लागत बाजार कीमत से लगभग दोगुनी है। जिला उद्यान अधिकारी जितेंद्र कुमार के अनुसार आलू का बीज मंगवा दिया गया है। किसान अच्छी प्रजाति का बीज बोकर अच्छी पैदावार लेकर लाभ कमाएं।