बिजनौर में गंगा किनारे बढ़ रहा बारहसिंघा का परिवार
बिजनौर। गंगा का दलदली क्षेत्र बारहसिंघा से गुलजार हो चुका है। वन विभाग की टीम को अब तक रावली क्षेत्र में 100 से ज्यादा बारहसिंघा दिख चुके हैं। करीब आठ साल बाद इतनी तादाद में बारहसिंघा गंगा के किनारे दिखे हैं। इनकी संख्या अभी और बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है। वन विभाग की ओर से बारासिंघा को संरक्षण देने के लिए गंगा के डूब क्षेत्र में कांबिंग कराई जा रही है।
खूबसूरत शरीर और गजब की स्फूर्ति के मालिक बारहसिंघा का कभी गंगा के दलदली क्षेत्र में बड़ी संख्या में पाए जाते थे। 2013 में केदारनाथ आपदा के समय बारहसिंघा को काफी नुकसान हुआ था। तब काफी संख्या में ये पानी के तेज बहाव में बह गए थे। हालांकि यह वन्य जीव बहुत ही कुशल तैराक होते हैं, लेकिन पानी के तेज बहाव में ये खुद को नहीं बचा सके। इसके बाद से गंगा के तट पर इक्का दुक्का बारहसिंघा ही कभी कभार दिखते थे। पिछले साल वन विभाग को दलदली क्षेत्र में बारहसिंघा के झुंड दिखाई दिए थे। इनकी सुरक्षा के लिए यहां पर वनकर्मी मुस्तैद किए गए। शिकारियों से बचाने के लिए समय समय पर गश्त भी कराई गई। अब धीरे-धीरे गंगा किनारे बारहसिंघा का कुनबा बढ़ने लगा है। वन विभाग की टीम को अब तक गंगा किनारे 100 से अधिक बारहसिंघा दिख चुके हैं।
वनों में कर जाते हैं प्रवास
बारहसिंघा बहुत अच्छे तैराक होते हैं। लेकिन फिर भी बरसात के समय ये गंगा के किनारे से उत्तराखंड की ओर वन क्षेत्र में प्रवास कर जाते हैं। वहां बाढ़ आदि का कोई खतरा इन्हें नहीं होता है। बरसात के बाद ये फिर से गंगा किनारे आ जाते हैं। इनके पैर बहुत नाजुक होते हैं और गंगा किनारे के पानी में इनके खुर को कोई नुकसान नहीं होता है। डीएफओ डॉ. एम सेम्मारन के अनुसार बारहसिंघा को संरक्षित रखने के लिए काफी प्रयास किए जा रहे हैं। गंगा किनारे इनकी संख्या पहले से बढ़ी है।