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सहकारी समिति मिनी बैंक में डेढ़ करोड़ का गबन

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समिति में पांच साल से चल रहा था खेल
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बिजनौर। किसान सेवा सहकारी समिति फीना के मिनी बैंक के स्पेशल ऑडिट में करीब डेढ़ करोड़ रुपये के घपले का भंडाफोड़ हुआ है। विभाग को पांच साल तक इस गबन की भनक तक नहीं लगी। अब आरोपियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। गबन सामने आने के बाद से विभाग के हाथ पांव फूले हैं। मामले की द्विस्तरीय जांच जारी है। गबन की रकम बढ़ सकती है।
सहकारी समिति फीना में गबन का खेल वर्ष 2014 से चल रहा है। विभाग को पैसे की इस हेराफेरी की भनक पांच साल तक नहीं लग सकी। वर्ष 2019 में तत्कालीन एमडी के सेवानिवृत्त होने के बाद स्पेशल ऑडिट में डेढ़ करोड़ रुपये घपले के खेल का भंडाफोड़ हुआ। जिले में 96 किसान सेवा सहकारी समिति हैं। इनमें 28 में मिनी बैंक संचालित है। मिनी बैंक के छोटे किसान व मजदूर सदस्य होते हैं। अमित कुमार त्यागी सहायक निबंधक सहकारी समितियां के अनुसार सहकारी समिति फीना में लक्ष्य कुमार एमडी थे। वह वर्ष 2019 में सेवानिवृत्त हो गए थे। इसके बाद भुवनेश कुमार को एमडी नियुक्त किया गया। कार्यभार लेते समय भुवनेश कुमार को अभिलेखों में पैसे की हेराफेरी का शक हुआ था। उन्होंने इसकी शिकायत अधिकारियों से की थी।
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एआर ने बताया कि समितियों का रुटीन में जिला स्तरीय ऑडिट टीम से ऑडिट होता है। रुटीन ऑडिट में गड़बड़ी के शक पर स्पेशल ऑडिट की सिफारिश की गई थी। मिनी बैंक के स्पेशल ऑडिट में करोड़ों के गबन के खुलासा हुआ है। विभाग की ओर से दो स्तरीय जांच समिति गठित की गई। समिति में सहकारिता विभाग एडीसीओ सौरभ गुप्ता व पवन कुमार हैं। इसी के साथ सहकारिता बैंक बिजनौर के डीजीएम जांच में लगे हैं।
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जांच में और भी बढ़ सकती है रकम
बिजनौर। सहायक निबंधक सहकारिता के अनुसार जांच 2014 के अभिलेखों से लेकर 2019 तक की कराई जा रही है। जो अभी पूरी नहीं हुई है। जांच समिति ने अनंतिम रिपोर्ट सौंपी है। प्रथम दृष्टा करीब डेढ़ करोड़ का गबन सामने आया है। गबन की रकम बढ़ने से इनकार नहीं किया जा सकता है। अंतिम रिपोर्ट एक सप्ताह के अंदर आ जाएगी। विभाग ने आरोपी से गबन की धनराशि वसूलने को दबाव बना रखा है। उसने 38 लाख रुपया जमा कर दिया है। बताया कि मिनी बैंक में लोग पैसा जमा करने आते हैं। आरोपी ने किसान से पैसा लेकर फर्जी रसीद दे दी। पैसा बैंक में जमा नहीं किया। जो लोग एफडी बनवाने आए, उनकी एफडी रसीद बनाकर दे दी। परंतु पैसा गबन कर लिया। हेराफेरी के शिकार होने वाले किसान मजदूर की संख्या अभी तक 50-60 ही सामने आई है। जांच समिति की रिपोर्ट के बाद स्थिति साफ हो जाएगी।
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