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राशन डीलरों के बांट-माप की नहीं हो रही जांच

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राशन डीलरों के बांट-माप की नहीं हो रही जांच
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बिजनौर। हर तरह के खुले सामान को बेचने के लिए दुकानदारों को अपनी मशीन व बांट को बांट माप विभाग में पंजीकृत कराना होता है। इसके बाद पूरे साल के लिए उन्हें मापतौल का लाइसेंस मिल जाता है। इसके बाद भी समय समय पर बांट माप विभाग द्वारा इन दुकानों की चेकिंग होनी चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।
राशन की दुकानों पर कार्ड धारकों को अनाज व केरोसिन दिया जाता है। इलेक्ट्रानिक कांटे या तराजू दोनों से तोलकर राशन ग्राहकों को दिया जाता है। इलेक्ट्रानिक कांटे को हर एक साल व तराजू को दो साल में बांट माप विभाग से पंजीकृत कराना अनिवार्य होता है। नियम है कि विभाग के कर्मचारी कांटों को चेक करें। लेकिन ऐसा नहीं होता है। राशन डीलर ही कांटे आदि लगाने का काम करने वालों से कागज बनवाकर विभाग में जमा कर देते हैं। फिर से मापतौल की अनुमति ले लेते हैं। हालांकि ये कांटे उस समय ठीक ही रहते हैं लेकिन बाकी पूरे साल में फिर राशन की दुकानों की चेकिंग भी नहीं की जाती है। यह नहीं देखा जाता है कि दुकानदार जितना माल तोलकर बता रहा है। उतना है भी या नहीं। विभाग द्वारा त्यौहारों के समय मिठाई या किराना दुकानों की ही चेकिंग करके काम की इतिश्री कर ली जाती है।
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घटतौली की कभी नहीं होती शिकायत
काफी उपभोक्ता राशन डीलर के कांटों को सही ही मानते हैं। उनका कहना है कि राशन डीलर खुलेआम ही जनता को कम राशन तोलकर देते हैं। वे खुद कटौती करने की बात कहते हैं तो फिर घटतौली करने का मतलब नहीं बनता है। कभी राशन की घटतौली की शिकायत प्रशासन से की भी नहीं जाती है।
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चलेगा अभियान
जिला बांट माप अधिकारी जितेंद्र पांडेय का कहना है कि सभी राशन डीलरों के बांट, कांटों को पंजीकृत किया जाता है। समय समय पर अभियान चलाकर इनकी चेकिंग भी की जाती है। जल्दी ही राशन की दुकानों पर फिर से चेकिंग अभियान चलाया जाएगा।
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