धामपुर में आज शुरू होगा रंग का जुलूस
धामपुर। कस्बे में आज से अनूठे रंगोत्सव की धूम आज से शुरू हो जाएगी। सड़कों, तिराहों और चौराहों पर युवकों की टोलियों का रंग से भरे ड्रमों व लंबी पिचकारियों के साथ पांच दिन तक डेरा जमा रहेगा, जो हर आने जाने वालों को रंगों से सरोबार करेंगी। कस्बे में बृहस्पतिवार 25 मार्च से रंग एकादशी से गीले रंग के जुलूस निकाला जाएगा।
धामपुर में होली की यह परंपरा बहुत पुरानी है और पांच दिन तक रंग खेला जाएगा। धामपुर की होली उत्तरी भारत में ब्रज, बरसाना व वृंदावन की लठमार होली के बाद प्रसिद्व होली के त्योहार में शामिल है। इस दौरान चारों ओर हो-हल्ला रहता है। शांति व्यवस्था को कायम रखने को पुलिस प्रशासन की ओर से भरपूर प्रयास किया जा रहा है। हर मुहल्ले ओर वार्ड में अधिकारी गणमान्य लोगों के साथ मीटिंग कर त्योहार को आपसी भाईचारे में रूप में संपन्न कराने को सहयोग की अपील की जा रही है। शिक्षक यशपाल तुली का कहना है कि धामपुर की होली अपने आप में अनूठी है। यहां की होली का त्योहार सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है। मुसलिम भी हिंदूओं के इस पर्व में बड़ी संख्या में शामिल होकर होली खेलते है। उन्हें होली के रंगों से कोई गुरेज नहीं होता। जिस दिन धामपुर में दुल्हैंडी का जुलूस निकलता है तो वे जुलूस में शामिल लोगों को फलों का वितरण कर स्वागत करते है।
ठाकुर जी को होली का शौक था, तो मंदिर से निकलता है गीले रंग का जुलूस: विभू बंसल
मंदिर ठाकुरद्वारा बजिरया कमेटी के अध्यक्ष विभू बंसल का कहना है कि रंग की एकादशी का गीले रंग का जुलूस उनके मंदिर से शुरू होता है। ठाकुर जी (भगवान कृष्ण) को होली का शौक था। इसलिए मंदिर के पास स्थित फल चौक से गीले का जुलूस निकाला जाता है। बृहस्पतिवार को भी हर साल की तरह दस बजे से यहीं से धूमधाम से निकलेगा।
केमिकल युक्त रंगों का प्रयोग कतई न करें: पवन कुमार अग्रवाल
मंदिर कमेटी के पदाधिकारी पवन कुमार एडवोकेट का भी ऐसा ही कहना है। उन्होंने लोगों से होली के त्योहार पर आपसी भाईचारे को कायम रखने, केमिकल युक्त रंगों का प्रयोग कतई न करने की अपील की है।
पहले काले रंग और कीचड़ से खेली जाती थी होली
पालिका के पूर्व सदस्य लाला लाजपतराय मुखिया का कहना है कि धामपुर की होली का जूूलूस उनकी याद से पहले से निकलता आ रहा है। पहले यहां की होली बड़ी विचित्र थी। लोग नालियों की कीचड़ से होली खेलते थे। काल तेल को रंग के रूप में प्रयोग करते थे। पर अब ऐसा नहीं है।
इस बार सूखे रंग के जुलूस के जुलूस में होगी 20 झांकियां
आदर्श होली हवन समिति के अध्यक्ष रवि चौधरी का कहना है कि समिति की ओर धामपुर में इस बार 29 मार्च को 71 वां सूखे रंग का जूलूस निकलेगा। इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है। इससे एक दिन पहले 28 मार्च की शाम डांडिया और झांकियों के साथ जुलूस निकलता है। कोरोना महामारी को देखते हुए समिति की ओर से इस बार जुलूस में झांकियों की संख्या को 35 से घटाकर 20 कर दिया है।
टेसू के फूलों से बना रहे होली के प्राकृतिक रंग
कालागढ़। होली के पर्व को प्राकृतिक रंगों के साथ मनाने के लिए अनेक परिवार टेसू के फूलों से रंग बनाने में जुटे हैं। फूलों से रंग बनाने में लगे लोगों का कहना है कि पर्व को परंपरा और मर्यादा के साथ मनाने पर रिश्ते मजबूत होते हैं।
फाल्गुन के महीने में कालागढ़ में चारों ओर जहां भी निगाह जाती है, वहीं पर सड़कों व वनों में टेसू के पेड़ों पर फूलों की बहार आ रही है। मदमस्त करने वाली सुगंध के साथ वातावरण महक रहा है। ऐसे में होली के पर्व पर क्षेत्र में कई परिवार टेसू के फूलों से रंग बनाने में जुटे हैं।
राजेंद्र कुमार, माया देवी व उनके पुत्र संदीप कुमार ने बताया कि बुजुर्गों से विरासत में मिली परंपरा को आज भी कायम रखे हुए हैं। पेड़ों से टेसू के फूलों को जमा कर छाया में सुखाकर उनको पानी में भिगोकर जो रंग बनाया जाता है। वह किसी अमृत से कम नहीं है। इससे कोई बीमारी आदि नहीं होती है। बाजारों में मिलने वाले रंग मशीनों व रसायनों से बनते हैं। इनके असंतुलन से समस्या भी पैदा हो सकती है। होली पर खेतों में गेहूं भी पकने लगता है। ऐसे में गेहूं व पेड़ों पर फूलों की सौंधी सुगंध के बीच प्राकृतिक टेसू के फूलों से बना रंग मन को संतोष व शरीर को शीतलता प्रदान करता है। दीपक मैंदोला, उपेन्द्र डोबरियाल, कैलाश कुमार आदि का कहना है कि कालागढ़ क्षेत्र में होली के पर्व पर इस फूल के रंग पर्व में चार चांद लगा देते हैं।